नया शैक्षिक सत्र अप्रैल से शुरू होना है। स्कूलों में परीक्षाएं खत्म हो चुकी हैं। रिजल्ट तैयार कराया जा रहा है। छात्रों को रिजल्ट देने के साथ ही नए सत्र की कक्षाएं शुरू हो जाएगी। छात्रों को अगली कक्षा में दाखिला लेना है। वह अभी से किताब और कापियों की जानकारी करने में जुट गए। दुकान पर जाने के बाद पता चल रहा है कि कापी और किताबों के दाम 25 प्रतिशत बढ़ गए हैं।
एनसीईआरटी और सरकारी प्रकाशकों ने कापी और किताबों के दाम नहीं बढ़ाए हैं। निजी प्रकाशकों ने स्टेशनरी के साथ कापी किताबों के दाम में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दिया है। निजी प्रकाशन की मैथ की किताब जो 300 की बिक रही थी, उसकी कीमत इस साल 375 रुपये पहुंच गई है। शिक्षकों की मानना है कि यदि विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबें लगा दी जाए तो अभिभावकों का बोझ कम हो जाएगा। एनसीईआरटी की किताबें आज भी निजी प्रशासन की किताबों की तुलना में सस्ती के साथ ही ज्ञान वर्धक भी हैं। इतना ही नहीं एनसीईआरटी की किताबें प्रतियोगी परीक्षा के लिए भी काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबों के स्थान पर निजी प्रकाशक की किताबों को प्राथमिकता दे रहे हैं। स्टेशनरी विक्रेता आलोक कुमार बताते हैं कि इस साल निजी प्रकाशकों ने किताब और कापी का दाम 25 प्रतिशत बढा दिया है।
--कापी किताबों का दाम इतना अधिक बढ़ गया है कि बच्चों को पढाना मुश्किल हो रहा है। नौ और 10 के बच्चों को पांच से छह हजार की किताबें लगा रही है। किताब के बाद फीस और बस का किराया उपर से बोझ बन गया है। सरकार की कांपी किताब के दाम पर नियंत्रण करना चाहिए। - सिकंदर यादव धर्मापुर
पढ़ाई इतनी महंगी हो गई है कि जिसके पास दो या तीन बच्चे हैं वह किसी तरह से पढ़ाई करा रहे हैं। निजी स्कूलों में पढ़ाई कराना हर किसी के बस का नहीं है। पांच से दस हजार एडमीशन फीस, कापी किताब खरीदना भारी पड़ रहा है। नया सत्र शुरू होने वाला है। ऐसे में बजट बिगड़ गया है। - आलोक त्रिपाठी, गौराबादशाहपुर