जौनपुर। राजनीति के जानकारों का मानना है कि बिहार के चुनाव नतीजों को राष्ट्रीय राजनीति के परिपेक्ष्य में पॉजिटिव नजरिए से देखना चाहिए। एनडीए भले ही सत्ता में वापस आ रही है पर बिहार के नतीजों ने यह साबित कर दिया है कि अब जनता मुद्दों पर वोट करने लगी है।
राजनीति के जानकार जय प्रकाश सिंह कहते हैं कि पीएम मोदी और नितीश कुमार एनडीए का चेहरा थे जिनके नाम पर वोट मांगा गया। नतीजों पर गौर करें तो नितीश की पार्टी तीसरे नंबर पर है। एनडीए यह कहने की स्थिति में नहीं है कि आज भी पूर्ण बहुमत और आरामदेह बहुमत से सरकार बनाने जा रहे हैं। बिहार के नतीजे बताते हैं कि पहली दफा ऐसा हुआ है कि बिहार के चुनाव में रोजगार बड़ा सवाल बना। बिहार के चुनाव का जो पूरा सिनेरियो है उसे एक नया मोड़ देने का जो एक नया मोड़ देने का काम किया है महागठबंधन ने यह भारतीय राजनीति की दशा और दिशा तय करेगा। पूविवि के असिसेटेंट प्रोफेसर अजीत सिंह कहते हैं कि बिहार में सरकार चाहे जिसकी बने पर वहां के नतीजों ने यह संकेत जरूर दिए हैं कि अब मुद्दोें की राजनीति पर सभी दलों को आना होगा। आज बेरोजगारी के सवाल पर वोट का परिणाम है कि आरजेडी बिहार की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। मुद्दे उठेंगे तो पालिटिक्स बदलेगी। सल्तनत बहादुर पीजी कालेज के राजनीति शास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ कर्मचंद्र यादव का कहना है कि बिहार के नतीजे जनता के सवालों पर केंद्रित राजनीति के नतीजे हैं।