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मिलावटखोरों से हो जाएं सावधान, त्योहार का जायका बिगाड़ सकती हैं मिलावटी मिठाइयां

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जौनपुर। त्योहारों पर बाजार में मिठाइयां और अन्य खाद्य सामग्री की मांग बढ़ने लगी है। इसके साथ ही मिलावटखोर भी सक्रिय हो गए हैं। पिछले साल खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने 289 खाद्य सामग्रियों के नमूने लिए थे, जिनमें 93 में मिलावट पाई गई थी। त्योहारों में मिलावट की प्रवृत्ति और बढ़ने की आशंका है। इसको देखते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। साथ ही लोगों को जागरूक किया जा रहा है ताकि वे मिलावटी सामान लोगों तक पहुंचने से रोका जा सके।
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अक्तूबर और नवंबर महीने में नवरात्र, विजय दशमी, करवाचौथ, दीपावली, छठ जैसे महत्वपूर्ण त्योहार हैं। इन त्योहारों पर तमाम प्रकार की मिठाइयां, और खाद्य सामग्री की मांग बाजार में बढ़ जाती है। इसी का फायदा मिलावटखोर उठाते हैं। दुकानों में रखी रंग-बिरंगी मिठाइयां देखने में तो अच्छी लगती हैं, लेकिन रंगीन मिठाइयां स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं। डॉ. विवेक कुमार मिश्र बताते हैं कि सिंथेटिक रंगों और नकली मावे से बनी मिठाई खाने से आहार नली में अल्सर के साथ ही गुर्दों पर भी बुरा असर पड़ता है। तेल, घी, मावा, छेना, पनीर, मसालों, मिठाइयों की मांग त्योहार में बढ़ गई है। इनमें सबसे ज्यादा मिलावट की आशंका रहती है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन सक्रिय हुआ है, लेकिन वह सीमित मात्रा में ही नमूने ले पा रहा है। ऐसे में मिलावट से बचने का सबसे बेहतर तरीका सतर्कता ही है।
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खोवा, पनीर, दूध की करें पहचान
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी एके राय का कहना है कि जागरूकता से ही मिलावटी सामग्री खरीदने से बचा जा सकता है। खोवा की पहचान के लिए उसे फिल्टर पेपर पर रखकर आयोडीन की दो तीन बूंद डालें, अगर वह काला पड़ता है तो मिलावटी है। अगर अंगुलियों से मसलने पर दाने नजर आते हैं तो भी मावा मिलावटी है। सिंथेटिक दूध की पहचान के लिए उसे हथेलियों में रखकर रगड़े हैं, झाग निकले तो तो समझिए दूध सिंथेटिक है। चांदी का वर्क जलाने पर गेंद सी बन जाती है, लेकिन अगर वर्क नकली होगा तो स्लेटी रंग का जला कागज बन जाएगा। पनीर का टुकड़ा हाथ में मसलकर देखें। अगर यह टूटकर बिखरे तो समझ लीजिए मिलावटी है। क्योंकि इसमें मौजूद ‘स्किम्ड मिल्ड पाउडर’ दबाव नहीं सह पाता।
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289 में से फेल हुए 149 नमूने, 127 के खिलाफ हुआ मुकदमा
जौनपुर। मिलावटखोरों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से चलाए गए अभियान के तहत पिछले एक साल में 289 नमूने लिए गए। इनमें 149 नमूने फेल हो गए। 93 नमूनों में मिलावट पाई गई थी। उसमें सेहत के लिए 20 असुरक्षित थे और 36 नमूनों की पैकिंग नियम के अनुसार नहीं थी। 127 के खिलाफ एडीएम कोर्ट में मुकदमा किया गया और 14 मुकदमें न्यायिक कोर्ट में दाखिल हुए। 16 मामलों में संबंधित के खिलाफ 1.60 लाख जुर्माने की सजा सुनाई गई। जो नमूने मिलावटी पाए गए, उसमें दूध के 37, खोवा के 8, पनीर के 9, दूध से बनी मिठाइयों के 16, सरसों तेल के सात, दाल के 14, नमकीन के 16 और इतने ही नमूने बिना दूध से बनने वाली मिठाइयों के थे।
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छह दिन में लिए गए 17 नमूने
जौनपुर। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी एके राय ने बताया कि नवरात्र को देखते हुए 15 अक्तूबर से अभियान चलाया जा रहा है। इन दिनों खास तौर से फल, दूध और व्रत में इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्रियों की जांच की जा रही है। साबूदाना, केला, दूध, सिंघाड़ा आटा, कुट्टू का आटा, बर्फी, मखाना, छुहाड़ा, मूंगफली और काजू के 17 नमूने जांच के लिए भेजे गए।
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