अतुल ने बताया कि उनकी पत्नी ने शुरू में 1 करोड़ रुपये की मांग की, बाद में मांग बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये कर दी। अतुल ने सुसाइड नोट में लिखा कि उनके खिलाफ 9 मामलों में छह के मुकदमे ट्रायल कोर्ट और तीन हाईकोर्ट में थे। दो साल में कोर्ट की 120 तारीखें लगीं जिससे पूरी तरह टूट गया। जौनपुर परिवार अदालत की जज रीता कौशिक और उनके स्टाफ ने मामला निपटाने के लिए 5 लाख रुपये की रिश्वत भी मांगी। अतुल ने लिखा, इस सिस्टम ने मुझे न्याय नहीं दिया, मेरा फैसला बाकी है।
'शव के पास भी ना आ पाए पत्नी'
अतुल ने सुसाइड नोट में अपनी कुछ अंतिम इच्छाएं भी लिखीं। उन्होंने साफ किया कि मरने के बाद पत्नी और उसके परिवार वालों को शव के पास भी नहीं आने दिया जाए। बेटे की कस्टडी उनके माता पिता को दी जाए, क्योंकि पत्नी उसे अच्छे संस्कार देकर नहीं पाल सकती। अतुल ने लिखा कि उनकी अस्थियों का विसर्जन तब तक नहीं किया जाए जब तक उनकी पत्नी और उसके परिजनों को सजा नहीं हो जाती। ये भी लिखा कि अगर उन्हें सजा न हो तो उनकी अस्थियों को अदालत के बाहर गटर में ही बहा दिया जाए। अतुल ने यूपी के मुकाबले कर्नाटक की अदालतों पर अधिक भरोसा जताया और आगे पत्नी के खिलाफ बंगलूरू की अदालत में मुकदमा चलाने की मांग की।