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तेज धूप और गर्मी से पशु बेहाल, घटा दूध उत्पादन

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जौनपुर। गर्मी और तपिश से आम जनजीवन के साथ ही पशु भी बेहाल है। गर्मी में हरे चारे पानी आदि की कमी के चलते दुधारू पशुओं ने दूध देना कम कर दी है। इससे पशुपालक चिंतित है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि इस मौसम में पशु खाना कम कर देते है ऐसी स्थिति में दूध में भी कमी आ जाती है। धूप और लू से पशुओं में बीमारियां होने की आशंका भी बना रहता है। ऐसे में पशुपालकों को अपने पशुओं पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
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जिले में पशुओं की संख्या 11 लाख 21 हजार के करीब है। इसमें से करीब पांच लाख दुधारू पशु है। इस साल मार्च माह के अंतिम साप्ताह से गर्मी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था। इस समय पारे 40 के पार पहुंच गए हैं। ऐसे में दुधारू पशुओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। बढ़ती गर्मी में पशुओं की सही देखभाल न की जाए तो उनके बीमार होने का खतरा हो जाता है और दुग्ध उत्पादन में भी कमी आती है।
दुधारू जानवरों की हिफाजत भरपूर कर रहा हूं। सुबह शाम दोनों वक्त नहलाने के साथ ही धूप से बचाने के लिए छप्पर में बांधता हूं। पहले जो भैस 10 किलो दूध दे रही थी, वह घटकर छह किलों पर आ गई है। भूसा, चूनी, चोकर की बढ़ती कीमत के कारण दूध की कमी खल रही है। - बाबूराम यादव भलुआही
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भैंस पहले आठ किलो दूध दे रही थी। उसको खिलाने पिलाने में भी कोई कमी नहीं कर रहा हूं, लेकिन पिछले दस दिन से दूध आधा हो गया है। लोगों से जब दूध की कमी की बात करता हूं तो लोग कहते हैं कि तपिश में मदार में भी दूध नहीं निकलता है, जो दूध दे रही है वह बहुत है। कम दूध को लेकर परेशान हूूं। - रामकेस यादव, तियरा
लू से हीट स्ट्रोक का खतरा
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि इन दिनों तपिश बढ़ने और लू चलने से पशुओं में हीट स्ट्रोक की आशंका है। हीट स्ट्रोक से पशु को तेज बुखार हो जाता है और पशु सुस्त होकर खाना पीना बंदकर देता है। पशु के सांस लेने की व नाड़ी की गति तेज हो जाती है। पशुओं में यह दशा रूक-रूककर यदि दो महीने से अधिक समय तक बनी रहती है तो पशु को सांस लेने में परेशानी होने लगती है तो वह हांफने लगता है और वह बेहोश हो जाता है। ठीक से उपचार न मिलने पर उसकी मौत भी हो सकती है। इसलिए पशुओं को पशुपालक ज्यादा देर तक धूप न रहने दें। समय-समय पर चारा पानी देकर छाया में ही बांधे।
गर्मी में ऐसे करे पशुओं का बचाव
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि पशुओं को लू से बचाने के लिए धूप में न जाने दें, बार-बार पानी पिलाएं। दिन में दो बार सुबह और शाम जरूर नहलाएं। थोड़े-थोड़े अंतराल पर खिलाएं। पशुओं को पेड़ों के नीचे अधिक देर तक न बांधे, पशुशाला पक्की है तो छत पर सूखी घास रखें, जिससे छत ठंडी रहे। टिनशेड और कम ऊंचाई की पक्की छत के नीचे पशुओं को बांधने से बचें। सूखे चारे की अपेक्षा हरे चारे का अधिक इस्तेमाल करें। समय समय पर बीमारी से बचाव का टीका लगवाएं। कहा कि समय-समय पर पशुओं को नहलाना, हरा चारा, पानी मिलता रहे तो दूूध उत्पादन में कमी नहीं आ सकती है।
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