सामान्य परिवार में पैदा हुई मंजीत कौर शहीदों की कुर्बानी को जिंदा रखने के लिए युवाओं की बीच अलख जगा रहीं है। विगत बीस वर्षो से देश की सभी शहीदों की जयंती मनाना उनकी दिनचर्या बन गई है। आर्थिक तंगी के बाद भी टीडी कॉलेज से एमए और एलएलबी की डिग्री हासिल कर अपने पैर खड़ी हुई हैं। एलएलबी करने के बाद वह वकालत कर है। पिता से विरासत में मिली समाज सेवा को आगे बढाने के लिए एक टीम तैयार कर लिया है। समाज सेवा के लिए उन्हें जिला प्रशासन ने कई सम्मानित किया है। वर्तमान में वह टीडी कॉलेज से एलएलएम की पढ़ाई करी रही हैं।
पवारा क्षेत्र के खालसा मुरादपुर निवासी सरदार डा. धरम सिंह की पुत्री के रूप में पैदा हुई मंजीत कौर की पहचान समाजसेवी के रूप में बन चुकी है। शहीदों की जयंती पर शहीद स्मारक पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करना उनकी दियचर्या बन गई है। विद्यालयों में छात्राओं को जागरूक करना, जूडो, कराटे का प्रशिक्षण देकर आत्म निर्भर बनाने का काम भी कर रही है। 1989 को जन्मी मंजीत कौर जब 11 साल की थीं तभी उनकी माता कमलजीत कौर का निधन हो गया। तभी से पिता डा. धरम सिंह के रहकर लक्ष्मीबाई ब्रिगेड का गठन कर लिया। संगठन के जरिए पीडित महिलाओं और मजलूमों को न्याय दिलाना उनकी प्राथमिकता बन चुकी है। तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक उनकी आवाज उठा रही हैं। स्वतंत्रता सेनानियों का इतिहास की मशाल को जलाकर युवाओं को प्रेरणा दे रही है। विगत कुछ दिनों से पिता डा. धरम सिंह की तबियत ठीक नहीं चलने के कारण उनकी देखभाल भी करनी पड़ रही है। पिता से सहयोग नहीं मिलने के कारण संगठन के सभी कार्यों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।