अखिलेश यादव हमेशा बाबा साहेब का अपमान करते रहे हैं। बताया कि कन्नौज मेडिकल कॉलेज का नाम डॉ. भीमराव आंबेडकर मेडिकल कॉलेज था, अखिलेश को बाबा साहेब से इतनी नफरत है कि मुख्यमंत्री बनते ही बाबा साहेब का नाम हटा दिया।
जिला भीमनगर का नाम बदल जिला संभल कर दिया। बाबा साहेब का नाम न इन्हें पसंद था और न ही संभल के तत्कालीन समाजवादी पार्टी सांसद शफीकुर्रहमान बर्क को। जिला रमाबाई नगर का नाम बदल कानपुर देहात कर दिया। महान दलित संत के नाम पर बने जिला रविदास नगर का नाम बदलकर भदोही कर दिया।
कहा कि अखिलेश को दलित संतों से भी नफरत है। दलित महापुरुष के नाम पर बने सहारनपुर मेडिकल कॉलेज का नाम बदलकर शेख-उल-हिंद मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज कर दिया। ये दलितों को अपमानित करना और मुस्लिम तुष्टिकरण की पराकाष्ठा है।
पूर्व विधायक सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि सपा कभी भी दलितों के साथ नहीं रही। उनके मुख्यमंत्री के कार्यकाल में या मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में, जितना उत्पीड़न दलितों के ऊपर हुआ उतना कभी नहीं हुआ। कहा कि सपा मुखिया अखिलेश यादव बाबा साहेब के नाखून के बराबर भी नहीं हैं।
उन्होंने आगे कहा कि 6 सितंबर, 2016 को अखिलेश यादव गाजियाबाद में आला हजरत हज हाउस का लोकार्पण कर रहे थे। मंचासीन तत्कालीन कद्दावर मंत्री आजम खान ने बाबा साहेब को भू-माफिया बताया तो अखिलेश यादव ताली बजाकर ठहाके लगा रहे थे।
कहा कि बाबा साहेब बौद्ध धर्म को मानते थे। बौद्ध धर्म से संबंधित जिला प्रबुद्ध नगर और पंचशील नगर के नाम बदल जिला हापुड़ और शामली कर दिया। दलितों से इतनी नफरत कि मुख्यमंत्री बनते ही अखिलेश ने एक लाख से अधिक दलित अधिकारियों को अपमानित करके उन्हें पदावनत कर दिया।
कार्यक्रम को सरस गौड़, श्याम मोहन अग्रवाल, नरेंद्र उपाध्याय, रागिनी सिंह, अनिल गुप्ता, अजय सरोज, नंदलाल यादव, कृष्ण कुमार जायसवाल, विकास शर्मा, कमलेश निषाद, सारिका सोनी ने भी संबोधित किया। संचालन जिला महामंत्री सुशील मिश्र और पूर्व नगर अध्यक्ष अमित श्रीवास्तव ने किया।