जौनपुर। शासन ने बुधवार को बड़े प्रशासनिक फेरबदल में जनपद के पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह का तबादला कर दिया। उन्हें पुलिस अधीक्षक, पीएसी मुख्यालय लखनऊ की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी जगह साल 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी यशवीर सिंह को जिले का नया एसपी बनाया गया है। वह इससे पहले बस्ती जिले के एसपी थे।
यशवीर सिंह अलीगढ़, जालौन, सोनभद्र, गाजीपुर, सिद्धार्थनगर और रायबरेली में भी एसपी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। फरवरी 2026 में उन्हें रायबरेली से स्थानांतरित कर बस्ती का एसपी बनाया गया था। कुंवर अनुपम सिंह ने चार फरवरी 2026 को जनपद के एसपी का कार्यभार संभाला था। करीब आठ महीने के कार्यकाल में अपराध नियंत्रण के साथ पुलिस अनुशासन को लेकर भी कई कार्रवाई हुईं। लापरवाही, अनुशासनहीनता और अन्य आरोपों में पुलिसकर्मियों पर निलंबन और विभागीय कार्रवाई की गई। दो मामलों में 10 पुलिसकर्मियों पर की कार्रवाई वहीं, कुछ गंभीर आपराधिक घटनाओं में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने के बाद भी संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करनी पड़ी। सितंबर में सफदरगंज बाजार गोलीकांड की जांच में लापरवाही सामने आने पर पूर्वांचल विश्वविद्यालय चौकी प्रभारी समेत छह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई। वहीं, लाइन बाजार थाना क्षेत्र के रामदयालगंज-रसैना में विशाल यादव हत्याकांड में पुलिस की लापरवाही सामने आने पर दो उपनिरीक्षकों समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। दोनों मामलों में 10 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई। इसी अवधि में बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के आरोप में सुरेरी थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह को निलंबित किया गया। सुरेरी थाने में वसूली के आरोपों से जुड़े मामले ने भी पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए। इसके पहले बक्शा में आरोपी को पकड़ने गई पुलिस टीम पर पथराव और दूल्हा हत्याकांड जैसी घटनाएं भी कार्यकाल के दौरान चर्चा में रहीं। हर घटनाओं में संबंधित और समीप के सर्किल की फोर्स को मौके पर भेजने और आरोपियों की गिरफ्तारी के चलते काफी चर्चा में रहे। वहीं, दूसरी ओर, वांछित और गैर जमानती वारंट वाले आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाया गया। आठ माह के कार्यकाल में पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और अपराधियों के खिलाफ अभियान के साथ पुलिस के सामने कई चुनौतियां भी बनी रहीं। अब नए एसपी यशवीर सिंह के सामने अपराध नियंत्रण के साथ सड़क दुर्घटनाओं में कमी, पुलिस अनुशासन और लंबित मामलों के निस्तारण की चुनौती होगी।