06- दोपहर 12 बजे कोतवाली चौराहे पर लॉकडाउन में मिली छूट के चलते कुछ ऐसा रहा नजारा।
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जौनपुर। लॉक डाउन के कारण 24 मार्च से लगातार बंद चल रही दुकानें 57 दिनों बाद बुधवार को खुलीं तो बाजार फिर से पुरानी रंगत में लौटता दिखा। सड़कों पर पुरानी तंगी और बार-बार लगते जाम ने कोरोना संकट से पूर्व के हालात की याद दिला दी। लंबे समय से अटके कामों को निपटाने में लोगों की जल्दबाजी इस कदर थी कि कई जगह सोशल और फिजिकल डिस्टेंसिंग के मानक भी टूटते दिखे। बाइक पर दो सवार फर्राटे भरते रसहे तो ई-रिक्शा और चार पहिया वाहनों में क्षमता से अधिक लोग सवार होकर यात्रा करते रहे। दुकानदारों में पूरी सतर्कता रही। ग्राहकों की संख्या भले ही कम रही, मगर नियमों के पालन के प्रति पूरी तरह सजग रहे। वह दुकान में घुसते ही ग्राहक का हाथ सैनिटाइज करा रहे थे। खरीदारी के वक्त ग्राहक से फिजिकल डिस्टेंसिंग बनाए रखने का भी अनुरोध करते दिखे। कुल मिलाकर पिछले 57 दिनों से ठहरी जिंदगी की गाड़ी पहली बार पटरी पर लौटती नजर आई। हालांकि अभी पहला दिन होने के कारण तमाम लोग बाहर निकलने में हिचकते रहे, मगर जल्द ही स्थितियां सामान्य होने की उम्मीदें बलवती हो गई हैं।
अटाला मस्जिद में गिनी-चुनी दुकानें ही खुली थीं। कपड़ा की दुकानों पर ग्राहक ईद की खरीदारी के लिए पहुंचे। दुकान में प्रवेश से पहले ही हैंड सैनिटाइजर से दिया गया। इसके बाद ही दुकान में प्रवेश करने दिया जा रहा था। ग्राहकों की संख्या कम होने से फिजिकल डिस्टेंसिंग का मानक भी पूरा होते नजर आया। सड़कों पर चहल-पहल सामान्य दिनों जैसी तो नहीं थी, लेकिन लॉक डाउन खुलने का असर जरुर दिख रहा था। चाय-नाश्ते की दुकानें बंद रहीं।
कोतवाली चौराहा पर सड़कों पर भीड़ उमड़ पड़ी।सड़क के दोनों पटरियों पर सजी दुकानों पर ग्राहक खरीदाते करते रहे। ज्वेलरी की दुकानें खुली थीं, मगर वहां ग्राहक कम थे। फल, किराना व अन्य दुकानों के अंदर और बाहर भी ग्राहक जमे थे। वाहनों की भीड़ से कई बार जाम की स्थिति बनी, जिसे संभालने के लिए ट्रैफिक व्यवस्था संभालने वाले जवानों को सड़क पर आना पड़ा। सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों को तार-तार करते लोग बेपरवाही से आवाजाही करते दिखे।
कपड़ा और सराफा की मंडी चहारसू चौराहा पर दुकानों पर ग्राहक कम थे, मगर सड़कों पर भीड़ सामान्य दिनों जैसी ही रही। ट्रैफिक पुलिस के जवान चौराहे पर खड़े होकर हर आने-जाने वालों को लॉक डाउन के नियमों का भी पाठ पढ़ा रहे हैं। कई बाइक पर दो सवार तो ई-रिक्शा में क्षमता से ज्यादा यात्रियों के सवार होने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उन्हें हिदायत देकर छोड़ा। बिना मास्क घूमने वालों को भी सबक सिखाया। सरपट दौड़ती जिंदगी में आगे बढ़ते लोग जल्द से जल्छ काम निपटाने को आतुर नजर आए।
शहर के हृदय कहे जाने वाले ओलंदगंज में ज्यादातर दुकानें खुली रहीं। फल वाली गली में चाय की दुकानों पर सन्नाटा जरूर रहा क्योंकि प्रशासन ने चाय की दुकान खोलने की अनुमति नहीं दी है। । फल, किराना, मिट्टी के बर्तन, मोबाइल, कास्मेटिक आदि की दुकानों पर चहल-पहल थी। इक्का-दुक्का ग्राहक खरीदारी में मशगूल रहे। कॉस्मेटिक के दुकानदार शैलेंद्र साहू ने बताया कि कई दिनों बाद आज दुकानें खुली हैं। धीरे-धीरे लोगों को जानकारी होगी तो वह भी खरीदारी के लिए पहुंचेंगे।