केराकत। कोतवाली परिसर स्थित हनुमान मंदिर में शीघ्र ही अष्टधातु निर्मित मां दुर्गा की प्रतिमा को स्थापित किया जाएगा। यह वही प्रतिमा है जो वर्ष 2011 में गोमती नदी से मछुआरों के जाल में निकली थी, लेकिन परिस्थितियों के चलते अब तक कोतवाली परिसर के मालखाने में सुरक्षित रखी गई थी।
पुलिस के अनुसार सन् 2011 में जब यह प्रतिमा गोमती नदी से प्राप्त हुई तो उसे लेकर कई गांवों के लोग एकत्र हो गए थे और इसे अपने अपने गांव ले जाने की मांग करने लगे थे। स्थिति तनावपूर्ण होते देख उस समय के कोतवाल ने विवेकपूर्ण निर्णय लेते हुए प्रतिमा को किसी को न सौंप कर कोतवाली के मालखाने में सुरक्षित रखवा दिया।
अब 14 वर्षों बाद वर्तमान कोतवाली प्रभारी अवनीश कुमार राय ने इस प्रतिमा को स्थापित कराने का निर्णय लिया है। कोतवाल ने बताया कि विशेषज्ञों के मुताबिक यह प्रतिमा अष्टधातु से बनी हुई है और लगभग 200 वर्ष पुरानी है। मौजूदा समय में इसकी कीमत एक करोड़ से अधिक है। प्रतिमा की बनावट शिल्पकला और धातु संरचना इसे अत्यंत मूल्यवान व ऐतिहासिक बताती है। इस खोज के बाद यह निर्णय लिया गया कि माँ दुर्गा की यह प्रतिमा अब सार्वजनिक आस्था का केंद्र बनेगी। इसे कोतवाली परिसर स्थित हनुमान मंदिर के बगल में विधिवत पूजा अर्चना के साथ स्थापित किया जाएगा। इसके लिए विशेष प्राण-प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र के संत-महात्मा, प्रशासनिक अधिकारी राजनेता समाजसेवी व श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग लेंगे।
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