मयंक के परिजनों में खुशी
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वह नवंबर 2018 को काबुल गए थे और इसी साल जून माह में आना चाहते थे, लेकिन किन्हीं कारणों से नहीं आ पाए। उधर, अफगानिस्तान में बिगड़े हालात में वह भी फंस गए थे। हालांकि उनकी बात परिवार के लोगों से लगातार हो रही थी, लेकिन वहां की स्थिति के बारे में जानकारी होने पर परिवार के लोग डर गए थे। पूरा परिवार टीवी पर नजर लगाए रहता था। सभी मयंक के सलामती की दुआ कर रहे थे।
मयंक को राखी बांधती बहन।
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बहनों ने बांधी राखी
काबुल में फंसे मयंक रविवार सुबह अपने घर पहुंचे। बेटे को सही सलामत देख स्वजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े तो दोनों बहनों आकांक्षा और अपूर्वा सिंह के लिए तो ये रक्षाबंधन का सबसे बड़ा उपहार था। भाई के काबुल में फं से होने की खबर से दोनों बहनों की जान सांसत में फंसी हुई थी। पिछले दो साल से भाई को खुद राखी न बांध पाने की कसक दोनों बहनों ने इस बार के वहां से सकुशल लौट आने पर तुरंत मिटाई। घर पहुंच कर भाई को रक्षा सूत्र बांधा।