कोरोना संक्रमण का दंश झेल रहे अधिवक्ताओं की मदद की मांग को लेकर राष्ट्रीय संयुक्त अधिवक्ता मंच ने सोमवार को वर्चुअल मीटिंग की। इसमें तय किया गया कि सरकार ने उनकी मांगों को पूरा नहीं किया तो अधिवक्ता सड़क पर उतरेंगे। अपनी मांगों से संबंधित आठ सूत्री पत्रक मुख्यमंत्री को भेजा है।
राष्ट्रीय संयुक्त अधिवक्ता मंच की ओर से आयोजित वर्चुअल बैठक में जिले से भी कई अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया और विचार रखे। अधिवक्ताओं ने कहा कि कोरोना से मृत अधिवक्ताओं के परिजनों को आर्थिक मदद व आश्रित को नौकरी व कोरोना संक्रमित अधिवक्ताओं के उपचार का खर्च सरकार वहन करे। न्यायालय बंद होने के कारण जूनियर अधिवक्ताओं को वित्तीय मदद की जाए। कल्याणकारी टिकट का जो पैसा सरकार के पास जाता है उसे जोड़ कर अधिवक्ताओं की आर्थिक मदद की जाए। सरकार अधिवक्ताओं को पांच लाख रुपए लोन बिना किसी ब्याज के 7 वर्ष के लिए प्रदान करे। 60 वर्ष से अधिक उम्र के अधिवक्ताओं को पेंशन, गंभीर बीमारी से पीड़ित अधिवक्ताओं को एक लाख की आर्थिक मदद तथा मेडिक्लेम सुविधाएं भी सरकार दे। अधिवक्ताओं ने कहा कि लोगों को न्याय दिलाने वाले ही आज संकट में है। सरकार ने अगर शीघ्र अधिवक्ताओं की मांगें नहीं मानी तो अधिवक्ता कोरोना काल में भी सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे । बैठक में प्रदेश अध्यक्ष अजीत कांत मिश्र, प्रदेश प्रभारी मृदुल यादव ,राष्ट्रीय सचिव हिमांशु श्रीवास्तव ,हरे राम पांडेय, पुष्पा सिंह ,राधा यादव, सलमा खातून, सुरेंद्र प्रजापति, ओमप्रकाश पाल, शालिनी मिश्र, सूर्यमणि पांडेय समेत अन्य अधिवक्ता शामिल थे।