जौनपुर। सीवर लाइन के लिए सड़क खोदकर छोड़ दी है, जो शहरवासियों के लिए जान का दुश्मन बन रहे हैं। आए दिन गिरकर शहरवासी चुटहिल हो रहे हैं। इस दौरान वाजिदपुर, तारापुर, मियांपुर, सकरमंडी और हुसेनाबाद मोहल्ले में अभी सड़कों को खोदकर सीवर पाइप डालकर छोड़ दिया गया है लेकिन उसे बनाने का कोई कार्य नहीं किया जा रहा है।
कारण, सीवर पाइप डालने का काम आठ माह से रुका पड़ा है। संबंधित कंस्ट्रक्शन कंपनी 30 किमी सीवर पाइप डालकर काम बंद किए हुए हैं। इससे खोदी गई सड़कें भी नहीं बन पा रही हैं। वहीं, तय समय से सीवर पाइप डालने का कार्य भी पूरा होने में संशय बना हुआ है। शहरवासियों को सीवरेज निस्तारण की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अमृत योजना के तहत 159 किलोमीटर सीवर पाइप डाली जानी है लेकिन यह कार्य अगस्त में पूरा किया जाना था लेकिन संबंधित कंस्ट्रक्शन कंपनी के ओर फरवरी में सीवर पाइप डालने का कार्य बंद कर दिया गया। इसके बाद आज तक कार्य पूरा करने की तिथि बढ़ाई जा रही है। दिसंबर में इस कार्य को पूरा करने की तिथि निश्चित की गई थी, लेकिन अब फिर इसे बढ़ाकर अगले साल सितंबर में पूरा करने की तिथि तय कर दी गई है। सिर्फ 30 किमी ही पाइप डाली गई है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि समय से एसटीपी शुरू नहीं हो पाएगी। इसके शुरू नहीं होने से शहर का गंदा पानी शोधित नहीं हो पाएगा। सवा तीन लाख आबादी वाले शहर में प्रतिदिन 28 एमएलडी गंदा पानी निकालता है, जो विभिन्न नालियों और नालों से होकर आदि गंगा गोमती नदी में गिरता है। गोमती नदी में गंदा पानी न गिरे, इसके लिए सरकार ने नमामि गंगे और अमृत योजना के तहत एसटीपी का निर्माण करने का निर्देश दिया। इन दोनों योजनाओं के तहत कुल मिलाकर 470.80 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई, जिसमें नमामि गंगे योजना के तहत 206.05 करोड़ की धनराशि से 30 एमएलडी क्षमता का एसटीपी और तीन पंपिंग स्टेशन और अमृत योजना के तहत 264.77 करोड़ की धनराशि से 159 किमी सीवर पाइप और एक पंपिंग स्टेशन बनाया जाना है। प्रत्येक पंपिंग सेट की क्षमता लगभग 12 एमएलडी की है। इसके निर्माण का कार्य अक्तूबर 2019 से शुरू किया गया था, जिसे दिसंबर माह में पूरा किया जाना है,लेकिन कार्यदायी संस्था तो अभी तक एसटीपी का निर्माण कार्य 95 फीसदी पूरा कर दिया है, लेकिन सीवर पाइप डालने का कार्य मात्र 30 किमी. तक ही पड़ा है,ऐसे में समय से एसटीपी का कार्य पूरा नहीं दिख रहा है।
14 बड़े नालों से गोमती में गिरता है गंदा पानी
जौनपुर। शहर का गंदा पानी कुल 14 नालों से गोमती नदी में गिरता है, जिसमें हनुमान घाट, बजरंग घाट, बलुआ घाट, मछरहट्टा, मियांपुर, कटघरा, नखास, अहियापुर, जेसिज, मुफ्ती मोहल्ला सहित अन्य नाला है, जिनका पानी एसटीपी का निर्माण होने जाने के बाद उसमें जाएगा, जिसे शोधित कर खेतों की सिंचाई सहित अन्य उपयोग में लाया जाएगा।
सीवर पाइप डालकर सड़कों के खोदकर छोड़ने का जहां तक सवाल है तो उसे कंट्रक्शन कंपनी को जल्द से जल्द बना देने का निर्देश दिया गया है। कंट्रक्शन कंपनी की ओर से सीवर पाइप डालने का कार्य तकरीबन आठ माह से बंद किए हुए है, जिससे सीवर पाइप डालने का कार्य बंद है, लेकिन कार्य शुरू करने के लिए कंट्रक्शन कंपनी को पत्र भेजा गया है। - अंकुर श्रीवास्तव, एक्सईएन, जल निगम