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त्रिकोणीय तो कहीं बहुकोणीय जंग

Sun, 01 Jul 2012 12:00 PM IST
Jaunpur
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जौनपुर। नगर निकायों में आखिरी तस्वीर भी साफ होती नहीं दिख रही है। कहीं त्रिकोणीय तो कहीं बहुकोणीय मुकाबले के आसार दिख रहे हैं। ज्यादातर स्थानों पर आजाद उम्मीदवार दलीय उम्मीदवारों पर दबाव बनाए हुए हैं। भाजपा को बागियों से कड़ी चुनौती मिल रही है। सपा समर्थित उम्मीदवारों की हालत खराब है। जौनपुर में कांग्रेस भी भाजपा और बसपा समर्थित उम्मीदवार के बराबर आ खड़ी हुई है। निवर्तमान पालिकाध्यक्ष दिनेश टंडन भी महफूज नहीं हैं। मुंगराबादशाहपुर, शाहगंज, मडि़याहूं में भाजपा अंतरकलह से जूझ रही है। भाजपा के बागी पूरा चुनाव बंटाधार करने को तैयार हैं। शाहगंज, मछलीशहर, जफराबाद, केराकत और खेतासराय में निर्दलियों ने दबाव बना लिया है। जातिगत समीकरण और मोहल्लावाद भी हावी है।
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जौनपुर नगर पालिका में सबसे कड़ा मुकाबला दिख रहा है। निवर्तमान पालिकाध्यक्ष दिनेश टंडन हैट्रिक लगाने को बेताब हैं तो भाजपा के पंकज जायसवाल और कांग्रेस के आदर्श सेठ भी दबाव बनाने में कामयाब दिख रहे हैं। चुनाव को इतना मुश्किल बना दिया कि कोई भी खुद को सुरक्षित नहीं कर पा रहा है। उधर, सपा नेता श्रवण जायसवाल, यशपाल गुप्ता, पूर्व पालिका अध्यक्ष संध्या रानी श्रीवास्तव, डा चित्रलेखा सिंह, हाजी अशगर अली, शत्रुघ्न मौर्य, पीस पार्टी के धर्मेंद्र निषाद ने चुनावी समीकरण को उलझा दिया है। मतदाता भी चक्करघिन्नी बन गया है। मुकम्मल तौर पर किसी को जिताऊ घोषित नहीं किया जा सकता।
शाहगंज में त्रिकोणीय लड़ाई के आसार दिख रहे हैं। निर्दल उम्मीदवार जय प्रकाश गुप्ता, जितेंद्र सिंह चुनाव को सीधे प्रभावित कर रहे हैं। कांग्रेस के राम प्रसाद अग्रहरि भी कस्बे की फिजां बदलने में कामयाब हो गए। भाजपा की नीलम नंदन अग्रहरी को बागी अनिल मोदनवाल से कड़ी टक्कर मिल रही है। भाजपा के वोटों के बंटवारे के आसार दिख रहे है।
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मुंगराबादशाहपुर नगर पालिका में निर्दलीय उम्मीदवारों ने भाजपा के घनश्याम दास गुप्ता की जबरदस्त घेराबंदी की है। यहां भाजपा के घनश्याम दास गुप्ता, निर्दल रियाज अहमद, अपना दल के पशुपति नाथ गुप्ता एक दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। इसके अलावा भाजपा के बागी जदयू प्रत्याशी राजीव केशरी, कपिलमुनि गुप्ता भी चुनाव सीधा प्रभावित कर रहे हैं। मुस्लिम मतों के विभाजन में रईस अहमद भी सक्रिय भूमिका अदा कर रहे हैं। भाजपा उम्मीदवार के लिए विधायक सीमा द्विवेदी करीब एक सप्ताह कस्बे में ही डेरा डाले रही। सीमा ने फिजा बदलने की कोशिश की है।
जफराबाद नगर पंचायत में त्रिकोणीय जंग दिख रही है। जफराबाद नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर पिछले 75 वर्षों से एक ही परिवार का कब्जा है। विरोधी सहाय परिवार की कांग्रेस उम्मीदवार मनोरमा श्रीवास्तव को रोकने की कोशिश में हैं। निर्दल संत कुमारी तथा रेखा बरनवाल ने जबरदस्त घेराबंदी की है। मुकाबला इतना जबरदस्त है कि परिणाम कहीं भी जा सकता है। मनोरमा श्रीवास्तव को वर्षों पुरानी परंपरा को बचाए रखने में कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है।
मछलीशहर में निवर्तमान चेयरमैन संजय जायसवाल को निर्दलियों से कड़ी टक्कर मिल रही है। संजय को अपनी सीट सुरक्षित करने में खूब पसीना बहाना पड़ रहा है। निर्दल उम्मीदवार राम लखन मौर्य, बसपा समर्थित बबलू राइन कड़ी टक्कर दे रहे हैं। राष्ट्रीय लोकदल के संजय जायसवाल की कुर्सी खतरे में है। कांग्रेस के सदाकत अली को भी सदर विधायक नदीम जावेद ने रोड शो निकाल चर्चा में ला खड़ा किया। रोड शो के दौरान दिखी भीड़ को वोट में तब्दील करना सदाकत के लिए काफी मुश्किल दिख रहा है। फिर भी मुस्तैदी के साथ स्वजातीय मतों के ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे हैं।
मडि़याहूं नगर पंचायत में भाजपा की इंदू जायसवाल पार्टी की बगावत से जूझ रही हैं। यहां भाजपा नेता डा. परमजीत सिंह की पत्नी राजिन्दर कौर मुख्य मुकाबले में हैं। राजिन्दर कौर को पूर्व चेयरमैन लालजी सेठ का भी समर्थन हासिल है। निर्दल उम्मीदवार रुखसाना ने लड़ाई को रोचक बना दिया है। राजन्दिर कौर और रुखसाना के बीच कांटे की टक्कर दिख रही है। निर्दल उम्मीदवार फिरोज अंसारी की पत्नी शबनम फिरोज ने भी कस्बे की फिजां बदलने की कोशिश की है। कस्बे के लोग भी तय नहीं कर पा रहे कि चुनाव किधर जा रहा।
केराकत में निवर्तमान चेयरमैन सरिता गुप्ता भी खुद को सुरक्षित नहीं कर पा रही हैं। निर्दल मीना साहू से कड़ी टक्कर मिल रही है। चुनाव में भी पुरानी रंजिश देखी जा रही है। सरिता गुप्ता को व्यापार मंडल का भी समर्थन हासिल है। उनका दावा है कि मुस्लिम मतदाता उनके साथ खड़ा है। सपा से संबंध होने के नाते पार्टी के लोगों का भी वोट मिलेगा। हालांकि यहां सपा से तालुक रखने वाले छह लोग मैदान में हैं। सपा के परंपरागत मतदाता भी कई खेमों में बंटे हुए हैं। वैसे निर्दल कमला यादव, शबनम नाज भी चुनाव को रोचक बना रही हैं। खेतासराय में निवर्तमान चेयरमैन महजबीन शाह को भी निर्दल निर्मला गुप्ता से कड़ी टक्कर मिल रही है। भाजपा की ऊषा मौर्या पार्टी की अंदरूनी कलह से जूझ रही है। कांग्रेस की ऊषा चौधरी की भी हालत ठीक नहीं है।
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