जौनपुर। संपत्ति हथियाने के उद्देश्य से हाईकोर्ट का फर्जी स्थगन आदेश तैयार करने के अभियुक्त नगर कोतवाली क्षेत्र के आलमगंज निवासी आफताब अहमद हाशमी को दोषी करार देते हुए सीजेएम अशोक कुमार सिंह यादव ने शुक्रवार को पांच वर्ष के कारावास और 16 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
अभियोजन कथानक के अनुसार कोतवाली थानाक्षेत्र के आलमगंज मोहल्ला निवासी अंजनी कुमार ने थाने में इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई की कमिश्नरी वाराणसी में एक मुकदमा कमला देवी बनाम वक्फ औलाद विचाराधीन था। इसमें नौ अगस्त 2005 को वादी के पक्ष में फैसला हुआ। उस फैसले के आधार पर वादी ने संबंधित भूखंड पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया। विपक्षी आफताब अहमद हाशमी ने पुलिस को दिनांक पांच सितंबर 2005 को हाईकोर्ट के आदेश की फोटो कापी दी। रिट संख्या 5853 वक्फ औलाद बनाम कमला देवी में कार्यवाही स्थगित करने का आदेश था। उसी आदेश के आधार पर राज कालेज चौकी इंचार्ज ने सात सितंबर 2005 को अंजनी कुमार द्वारा कराए जा रहे कार्य को रोक दिया। वादी ने हाईकोर्ट जाकर पता लगाया तो पता चला कि ऐसा कोई आदेश हाईकोर्ट से पारित ही नहीं है। बल्कि उक्त रिट संख्या पर एक अन्य मामला मोहर सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य विचाराधीन था। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। अभियोजन पक्ष से पीओ एसपी सिंह ने कुल चार गवाह न्यायालय में परीक्षित कराया। मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आरोपी आफताब अहमद हाशमी को दोषी करार देते हुए पांच साल का कारावास एवं 16 हजार रुपये की अर्थदंड की सजा सुनाई।