जौनपुर। नगर पालिका से हटाए गए संविदाकर्मियों पर फैसला न होने से नपा की व्यवस्था डांवाडोल हो गई है। अगस्त 2012 में शासन के आदेश पर नपा में तैनात 94 संविदाकर्मियों को हटा दिया था। संविदाकर्मियों को हटाए जाने के बाद से ही नपा की व्यवस्था डांवाडोल होना शुरू हो गई। अकेले जलकल विभाग में ही 60 कर्मी हटाए गए थे। इसके चलते परेशानी खड़ी हो गई। इन सब की जानकारी नपा ने रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी थी। इसके बावजूद शासन ने संविदाकर्मियों पर कोई फैसला नहीं किया।
नगर पालिका में तैनात 94 संविदाकर्मियों को शासन ने अगस्त 2012 में हटा दिया था। शासन ने कहा था कि संविदाकर्मियों की कोई जरूरत नहीं है। इस पर नपा ने तर्क दिया था कि कर्मचारियों को जरूरत के मुताबिक रखा गया और पारिश्रमिक दिया गया। इन सब के बीच संविदाकर्मियों को मुक्त कर दिया गया। कर्मियों ने मुक्त होने के बाद कई बार नपा परिसर में हंगामा किया। कई दिनों तक प्रदर्शन चला। शासन ने प्रदेश भर में रखे गए संविदा कर्मियों के बारे में यह भी रिपोर्ट तलब की कि उनके हटाए जाने से नपा की व्यवस्था पर कितना असर पड़ा है। किस विभाग में किस पद पर तैनात थे। नपा ने शासन से मांगी गई सूचनाओं की पहली रिपोर्ट पिछले वर्ष फरवरी में ही सौंप दी थी। इसके बाद एक बार फिर रिपोर्ट दी गई। इसके बावजूद शासन ने संविदाकर्मियों पर कोई फैसला नहीं हुआ। हालांकि कर्मचारियों की कमी से नगर पालिका की व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। सबसे ज्यादा खराब हालत तो जलकल विभाग की है। सबसे अधिक कर्मचारी इसी विभाग से हटाए गए थे। इनमें पंप आपरेटर ज्यादा थे। कर्मियों की संख्या कम होने से गर्मी में परेशानी बढ़ना तय माना जा रहा है। नपा के सामने गर्मी में पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए ही मशक्कत झेलनी होगी। जलकल विभाग में तैनात कर्मियों की पाइप लाइन की मरम्मत, पेयजल व्यवस्था आदि के संचालन की जिम्मेदारी है। ईओ संजय शुक्ला का कहना है कि संविदाकर्मियों की शासन ने रिपोर्ट मांगी थी। उसे काफी पहले ही सौंप दिया गया है। उस पर फैसला शासन को ही लेना है।