जौनपुर। जगतजननी जगदम्बा की उपासना के लिये वासंतिक नवरात्रि का महापर्व छह अप्रैल दिन शनिवार से प्रारम्भ होगा। इस दिन से कलश स्थापना कर भक्त माँ के नौ स्वरूपों की पूजा करते है। नवरात्र को लेकर मंदिरों में साफ-सफाई शुरू हो गई है। बाजार में व्रत एवं अन्य सामानों की दुकानें सज गई है।
पं मुरारी श्याम पांडेय व्यास के अनुसार कोई भी देवी या देवता की शोडषोपचार पूजन हो, अनुष्ठान या यज्ञादि सभी में कलश की स्थापना एवं पूजन का विधान शास्त्रों में मिलता है। कलश में ब्रह्मा, विष्णु, महेश सहित चारों वेद, सभी तीर्थों, समुद्रों एवं देवी-देवताओं का वास होता है। ज्योतिषी डा. शैलेश मोदनवाल बताते हैं कि इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि छह अप्रैल शनिवार को दोपहर 2.58 बजे तक है। कलश स्थापना विधान प्रतिपदा तिथि के भीतर पूरे समय में की जा सकती है। वैसे प्रात:काल सर्वोत्तम समय माना जाता है। अभिजित मुहूर्त का समय दिन में 11.30 बजे से 12.18 बजे तक रहेगा। प्रात:काल से दिन में 2.58 बजे तक कलश स्थापना किया जा सकता है। इस वर्ष महाष्टमी का पर्व दिन शनिवार 13 अप्रैल को है। जबकि महानवमी के साथ रामनवमी का पर्व रविवार 14 अप्रैल को मनाया जायेगा। ज्योतिषविद् अन्नु मिश्रा का कहना है कि इस वर्ष धन धान्य में वृद्धि का योग है। इस वर्ष का राजा शनि के कारण उपद्रव तथा युद्ध का वातावरण होगा। दुर्भिक्ष, जनहानि, अल्प वर्षा व तेज वायु का प्रकोप होगा। इस वर्ष का मंत्री रवि होगा जिसके कारण राजपक्ष तथा तस्करों से जनता में भय होगा। फसल की अच्छी उपज होगी।