चालू वित्तीय वर्ष के तीन माह 17 दिन बीत जाने के बाद अभी तक 77 हजार 500 जाबकार्ड धारक ऐसे हैं। जिनको एक दिन का काम नहीं दिया गया है। वहीं 52 हजार 500 जाब कार्ड धारक ऐसे हैं। जिनको काम दिया गया है। जिसमें 20 जाबकार्ड धारकों को 100 दिन का काम दिया गया है।
मनरेगा योजना के तहत काम मांगने पर लोगों को काम दिया जाता है। इसके लिए जो लोग काम मांगते हैं। पहले उनका जांब कार्ड बनाया जाता है। इसके बाद उनको काम उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण जिले में यह योजना दम तोड़ रही है। विभाग के आकड़े पर गौर करें तो जिले में काम मांगने वाले जाबकार्ड धारकों की संख्या एक लाख 30 हजार है। जिनके द्वारा काम की मांग की गई है। लेकिन विभाग इनको 100 दिन का काम उपलब्ध कराने में फिसड्डी साबित हो रहा है। इस योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में अभी तक मात्र 20 जाबकार्ड धारक ऐसे हैं, जिनको सौ दिन का काम उपलब्ध कराया है। जबकि कुल 52 हजार 500 जाबकार्ड धारकों को काम तो दिया गया है। लेकिन किसी को 10 व 20 दिन तो किसी को 30 से 40 दिन का काम दिया गया है। वहीं 77 हजार 500 जांब कार्ड धारक एक दिन का काम नहीं पा सके हैं।
काम मांगने वाले जाब कार्ड धारकों को काम उपलब्ध कराया जा रहा है। कई जाब कार्ड धारक ऐसे हैं जिनके द्वारा काम की मांग नहीं की जाती है। यहीं कारण है कि वे काम पाने से वंचित हो रहे हैं।
कमलेश सोनी
प्रभारी डीसी मनरेगा