जौनपुर। सजना-संवरना भला किसे अच्छा नहीं लगता। लोग इस पर अच्छी-खासी रकम भी खर्च करते हैं। लॉक डाउन से पहले सैलून और ब्यूटी पार्लर का धंधा अच्छा चल रहा था। उसके बाद 60 दिन की बंदी ने व्यवसाय से जुड़े लोगों की कमर तोड़ दी है। करीब 12 हजार से अधिक परिवारों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। इनके समक्ष भुखमरी की नौबत आने लगी है।
जिले में दो महीने से ठप ब्यूटी पार्लर और सैलून के कारोबारियों को सरकारी स्तर से भी कोई मदद नहीं मिली है। सैलून संचालक और उस पर काम करने वाले कारीगरों के समक्ष परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि वह तो घर घर भी जाकर काम करने के लिए तैयार हैं लेकिन हालात ऐसे हैं कि कोई उन्हें घर पर भी बुलाना नहीं चाहता। उनके कई गहक तो अब घर पर ही बाल काटना सीख गए हैं। सैलून पर काम करने वाले तमाम कारीगरों की माली दशा बेहद खराब है। अधिकतर लोग रोज कमाने खाने वाले हैं। लॉक डाउन के शुरुआती दिनों में सैलून संचालकों ने कारीगरों की अपने स्तर से मदद की लेकिन बाद में वह भी लाचार हो गए। करीब 55 लाख से अधिक की आबादी वाले इस जिले में 4250 से अधिक सैलून और ब्यूटी पार्लर है। इन पर काम करने वाले कारीगरों की बात करें तो उनकी संख्या करीब 12000 से भी अधिक है। अकेले जौनपुर शहर में ही छोटे बड़े कुल 550 सैलून और ब्यूटी पार्लर हैं। इन पर काम करने वाले कारीगरों की संख्या करीब दो हजार है।