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15 सालों से निष्क्रिय पड़ी हैं43 साधन सहकारी समितियां

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15 सालों से निष्क्रिय पड़ी हैं43 साधन सहकारी समितियां
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डेढ़ लाख किसान बाजार से खाद व बीज लेने को होते हैं विवश
208 समितियों के सापेक्ष 165 समितियां हैं सक्रिय
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। जिले में 43 साधन सहकारी समितियां 15 सालों से निष्क्रिय पड़ी हैं। इन समितियों को सक्रिय बनाने के लिए कोई पहल भी नहीं हो रही है। जिससे इन समितियों से संबंधित लगभग डेढ़ लाख किसानों को खाद व बीज लेने में दिक्कत होती है। वे बाजार से महंगे दाम पर खाद व बीज खरीदने को विवश होते हैं।
जिले में छह लाख 55 हजार 912 किसान हैं। इनको आसानी से खाद व बीज उपलब्ध हो सके। इसके लिए जिले में 208 साधन सहकारी समितियां है। लेकिन वर्तमान समय में मात्र 165 समितियां ही सक्रिय हैं। इन समितियों को सरकार द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत पांच-पांच लाख की आर्थिक सहयोग देकर सक्रिय किया गया है। जिससे इन समितियों के लगभग पांच लाख किसानों को आसानी से खाद व बीज मिल जाता है। जिससे वह खेती कर फसलों का उत्पादन कर लेते हैं। लेकिन डेढ़ लाख किसानों को खेती करने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। कारण इन किसानों से संबंधित 43 समितियां 15 वर्षो से निष्क्रिय पड़ी हुई हैं। इन समितियों को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत आर्थिक सहयोग नहीं दिया गया है। जिसके कारण इन समितियों पर खाद व बीज उपलब्ध नहीं हो पाता है। खाद व बीज नहीं रहने से किसान बाजार से खरीदने को विवश होते हैं। लेकिन बाजार में बिकने वाली खाद व बीज नकली है की नहीं। इसका भी पता किसानों को नहीं चल पाता है। जिससे उनको आर्थिक चपत भी लगती है।
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इनसेट:निष्क्रिय समितियांजौनपुर।जिले में निष्क्रिय पड़ी समितयों के सहकारिता विभाग के आंकड़े को देखा जाए तो साधन सहकारी समिति मईडीह, पाली, हरीपुर, माधोपट्टी,मनेछा, नौरंगाबाद, अमिहित, पतरावन, मूर्तजाबाद, शिकारपुर, चंदवक, दुगौली व सुरेरी सहित 43 समितियां हैं।
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कोट:
समितियों को सक्रिय करने के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत शासन से धनराशि की मांग बराबर की जा रही है। लेकिन शासन से धनराशि नहीं मिल रही है। जिससे समितियां सक्रिय नहीं हो पा रही है।
अखिलेश प्रताप सिंह
सहायक निबंधक, सहकारी समितियां
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