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रोपे गए 42 लाख पौधे अब हो गए बेगाने

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केराकत के टंडवा गांव के कन्हईपुर पुरवा में पांच हेक्टेयर में लगे 5500 पौधो में से 55 पौधे ही बचे हैं। स - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। जनपद में इस बार 53 लाख 12 हजार 72 पौधे लगाने का लक्ष्य है। इसमें 42 लाख पौधों का रोपण हो चुका है। इन पौधों को लगाने के लिए स्थानीय लोगों सहित अधिकारी और जनप्रतिनिधियों ने खूब फोटो खिंचवाएं। लेकिन यह पौधे अभी से ही बेगाने नजर आने लगे हैं। सिंचाई और सुरक्षा की व्यवस्था न होने के कारण इन पौधों के सूखने और पशुओं के आहार बनने का खतरा बढ़ गया है। विभागीय आंकड़ों को देखे तो 2014-15 से लेकर अब तक 5,46,954 ही पौधे सूखे बताए जाते हैं, जबकि हकीकत इसके अलग ही दिखती है। पिछले साल जहां-जहां पौधे लगे थे, उनमें से बड़ी संख्या में पौधे सूख गए थे।
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पर्यावरण संरक्षण के लिए हर साल लाखों पौधे लगाने का कार्य किया जाता है। जुलाई माह में अभियान चलाकर पौधों को लगाने का कार्य किया जाता है। लेकिन, सिंचाई और पौधों के सुरक्षा को लेकर कोई कार्य नहीं किया जाता है, जिससे हर साल हजारों पौधे सूख जाते हैं। इससे सरकार को लाखों रुपये की क्षति भी होती है। मौजूदा समय में पिछले सालों के आंकड़ों की पड़ताल करने के बाद यही बात सामने आता है कि बड़ी संख्या में पौधे सूख जाते हैं। हरियाली के नाम पर कागजी खेल का असर है कि प्रदूषण का स्तर लगातार खतरे के ऊपर बना मिलता है, क्योंकि ग्रामीण इलाकों सहित, सहड़क और विभिन्न हाइवे के निर्माण के दौरान जिले में बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए हैं। सिर्फ जौनपुर-सुल्तानपुर हाइवे के निर्माण में ही 19 हजार पेड़ काटे गए थे। हालांकि इस बार इस सड़क पर 70 हजार पौधे लगाने का वन विभाग ने तैयारी की है। वहीं,आजमगढ़ और प्रयागराज मार्ग के चौड़ीकरण में भी हजारों पेड़ विकास की भेंट चढ़े हैं। काटे गए इन पेड़ों के सापेक्ष चार गुना पौधे लगाने का मानक है। हालांकि बड़ी संख्या में पौध रोपण भी हुआ था। लेकिन, इसी मार्ग पर अधिकांश पौधे सूख गए। बात पिछले ही सत्र की करें तो ग्राम पंचायतों में मनरेगा के माध्यम से पौधरोपण हुआ तो हाइवे के किनारे भी बड़ी संख्या में पौधे रोपे गए थे। लेकिन, इनकी सुरक्षा और देखभाल का समुचित इंतजाम नहीं किया गया। नतीजा ज्यादातर स्थानों पर पौधे नष्ट हो गए हैं। जौनपुर-शाहगंज मार्ग पर कुत्तुपुर तिराहा से पूर्वांचल विवि के बीच बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए थे। सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड भी लगे थे, लेकिन अब न तो ट्री गार्ड हैं और न ही पौधों का पता है। सीमेंट-बालू से बनाए गए यह ट्री गार्ड खराब कार्य के चलते गिर गए, जिसकी ईंट भी लोग उठा ले गए। यही हाल चौकिया धाम से आरा रोड पर लगाए गए पौधों का भी था। इस रोड पर पौधे लगाए गए लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए ट्रीगार्ड तक नहीं बनाया गया था, जिसके चलते पूरे पौधे नष्ट हो गए।
80 प्रतिशत सूख गए पौधे
मछलीशहर। प्रतिवर्ष क्षेत्र में खाली पड़ी भूमि में पौधरोपण कराया जाता हैं। देखरेख के अभाव में 80 प्रतिशत पौधे सुख जाते हैं। नगर स्थित रोडवेज बस स्टैंड परिसर में लगभग डेढ़ से दो सौ पौधे लगाए जा चुके हैं, किंतु देखरेख के अभाव में अब सुख चुके हैं। यही स्थिति छाछो प्राथमिक विद्यालय की खाली पड़ी भूमि में हुए पौधरोपण की भी है। यहां भी प्रतिवर्ष पौधे लगाए जाते हैं मगर वे देखरेख के अभाव में दम तोड देते हैं।
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एक ही स्थान पर तीसरी बार लगाए जा रहे पौधे
जौनपुर। महराजगंज क्षेत्र के चरियाही मिनी स्टेडियम के अगल-बगल मैदान में 14 वर्ष पहले 10 हजार पौधे लगाए गए थे लेकिन देखभाल के अभाव में मौजूदा समय एक भी पौधे नहीं दिखाई दे रहे हैं। ग्राम प्रधान बृजलाल यादव का कहना है कि पिछले वर्ष उनके द्वारा भी उसी मैदान में एक हजार पेड़ लगाया गया था। ऊसरीली जमीन में चहुंओर घेराबंदी न होने के कारण छुट्टा पशुओं द्वारा सब नष्ट कर दिया गया। इस बार फिर पौधे लगाया जा रहे हैं, जिसकी देखभाल के लिए समुचित इंतजाम करना आवश्यक है। इसी तरह गौराबादशाहपुर क्षेत्र में पिछले साल क्षेत्र के गौराबादशाहपुर बारी सड़क से पिलखिनी सरसौड़ा मनिहागोविंदपुर गांव तक सड़क के दोनों तरफ 500, वहीं गौराबादशाहपुर रामपुर मार्ग के दोनों किनारों और कुरेथु भट्ठे के पास 450 और नयन संड गांव के पास 600 करीब पौधे लगाए गए थे। कुछ पौधे बचे बाकी गर्मी और पशुओं की भेंट चढ़ गए। वहीं, बदलापुर क्षेत्र के मुरादपुर उसरा बाजार में स्थित तालाब पर विगत 10 साल पूर्व 1000 पौधारोपण हुआ था। रखरखाव के अभाव में तकरीबन 700 पेड़ सूख चुके हैं। एक हजार पौधरोपण के लिए अभी भी इस तालाब पर जगह खाली पड़ी हुई है। लेकिन यहां पौधरोपण नहीं हुआ है। गांव के सुरेंद्र ने बताया कि क्षेत्र में हरियाली के लिए तथा फ्री में ऑक्सीजन के लिए पौधरोपण नितांत आवश्यक है। लेकिन इस वर्ष इस तालाब पर पौधरोपण नहीं हुआ है जब की जगह काफी रिक्त है।
इस बार 53 लाख पौधे 15 अगस्त तक लगाए जाएंगे। अभी तक 42 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। सभी लोग जागरूक हैं। इस कारण कम से कम एक पौधा लगाने की जिम्मेदारी हर व्यक्ति को लेनी चाहिए। हर साल लगभग 10-20 फीसदी पौधे सूख जाते हैं। हालांकि पहले की तुलना में अब लोग इसे लेकर जागरूक हुए हैं, जिसका असर दिख रहा है। वन विभाग द्वारा लगाए जाने वाले पौधों की सुरक्षा तार घेरकर किया जाता है। इसके अलावा, हमारे पास पौधों की सुरक्षा के और कोई इंतजाम नहीं है। - प्रवीण खरे, डीएफओ
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