जौनपुर। गैर प्रांतों में फंसे मजदूरों के जौनपुर पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। चौबीस घंटे के अंदर मुंबई और गुजरात से प्रवासी मजदूरों को लेकर दस श्रमिक स्पेशल ट्रेनें बृहस्पतिवार को जौनपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन पहुंचीं। इन ट्रेनों से करीब 17 हजार यात्री आए हैं। सभी को स्टेशन पर उतरने के बाद तत्काल रोडवेज की बसों में बैठाकर संबंधित जिलों में भेज दिया गया। जौनपुर के सभी यात्रियों को क्वारंटीन सेंटर ले जाया गया, जहां थर्मल स्क्रीनिंग के बाद उन्हें घर भेजा गया। पिछले दस दिनों में अब तक जिले में 25 श्रमिक स्पेशल ट्रेन आ चुकी हैं। पूर्वांचल के अन्य जिलों की अपेक्षा यह आंकड़ा सर्वाधिक है।
बृहस्पतिवार को आने वाली ट्रेनों में छह मुंबई के विभिन्न स्टेशनों से यात्रियों को लेकर पहुंचीं। गुजरात के सूरत से दो और अहमदाबाद, बल्लाड से भी एक-एक स्पेशल ट्रेन पहुंची। प्रत्येक ट्रेन में 16-17 सौ यात्री सवार रहे। ट्रेनों के स्टेशन पर पहुंचने के बाद एक-एक कर सभी बोगियों को खोला गया। स्टेशन के बाहर लगी रोडवेज बसों में बैठाकर सभी को संबंधित जिलों में भेजा गया। लगातार ट्रेनों के आने से एक बार ऐसी स्थिति बन गई कि रोडवेज बसें ही समय से नहीं पहुंच पाई। ऐसे में कुर्ला से आई ट्रेन को दो घंटे तक स्टेशन पर खड़ा रखा गया। यात्री बाहर निकलने के लिए छटपटाते रहे। रोडवेज के एआरएम विजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कुल 500 बसें यात्रियों को घर छोड़ने के लिए लगाई गई थी। इसमें 90 जौनपुर डिपो की थी। अन्य बसें सुल्तानपुर, आजमगढ़, हरदोई, इटावा, फैजाबाद, अंबेडकरनगर सहित अन्य डिपो से बुलाई गई थी। एडीएम वित्त रामप्रकाश ने बताया कि बृहस्पतिवार को दस स्पेशल ट्रेन आई है। चार मई से अब तक कुल 25 ट्रेन जिले में आ चुकी है।
खाना तो दूर, पानी के लिए भी तड़पे
दो घंटे तक प्लेटफार्म पर ही खड़ी रही ट्रेन, पानी लेने भी नहीं उतर सके यात्री
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में गुजरात और महाराष्ट्र से आ रहे यात्री दुर्दशा के शिकार हैं। भूख मिटाने के लिए भोजन तो दूर उन्हें पानी के लिए भी तड़पना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार को जौनपुर जंक्शन पहुंची ट्रेनों में सवार यात्रियों ने ऐसी ही पीड़ा बयां की। कुर्ला से आई एक ट्रेन को दो घंटे तक जौनपुर जंक्शन पर ही रोके रखा गया। इस दौरान उन्हें ट्रेन से उतरने की इजाजत नहीं थी।
पानी भरने के लिए कई लोग बोतल लेकर गेट पर खड़े रहे तो कई पुलिसकर्मियों से मिन्नतें करते रहे। महराजगंज के मनोज कुमार यादव ने बताया कि सुबह 10 बजे ही ट्रेन पहुंच गई, लेकिन दो घंटे तक उतरने नहीं दिया गया। अफसरों का कहना था कि बस अभी नहीं आई है। पानी भी नहीं लेने दे रहे, जिससे प्यास बुझ सके। अशोक पटेल, जितेंद्र आदि ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से हालत खराब हैं। ट्रेन में भी दो दिन के सफर में खाना-पानी के लिए तड़पना पड़ा। पानी खत्म होने पर कहीं भी भरने नहीं दिया गया। यहां भी दो घंटे तक छटपटाते रहे। पूजा मौर्य, माधुरी ने बताया कि बड़े तो किसी तरह खुद पर नियंत्रण कर ले रहे हैं, लेकिन बच्चों का प्यास से बुरा हाल है। पानी नहीं मिलने से वह तड़पते रहे।
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मुंबई में रह रहे लोगों को घर भेजवा रहे ज्ञान प्रकाश
निजी खर्च से बसों की कर रहे व्यवस्था, साथ में दे रहे भोजन भी
जौनपुर। लॉकडाउन के कारण मुंबई में फंसे उत्तर भारतीयों के लिए जौनपुर के समाजसेवी ज्ञानप्रकाश सिंह मददगार बनकर आए हैं। उनकी संस्था लगातार निजी खर्च से बसों की व्यवस्था कर मजदूरों को घर भेज रही है। इसमें जौनपुर के लोगों की तादाद अधिक है।
खास बात यह कि बसों के इंतजाम के साथ ही उनके भोजन और राशन का इंतजाम भी किया जा रहा है, जिससे उन्हें कोई दिक्कत न हो। बृहस्पतिवार को भी एक बस 30 यात्रियों को लेकर जौनपुर पहुंची। जौनपुर पहुंचने पर ज्ञान प्रकाश सिंह की संस्था श्रीमती अमरावती श्रीनाथ सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से शिवा सिंह, बबलू दुबे, मिथिलेश तिवारी, नीतिश सिंह, मयंक नारायण, नीरज श्रीवास्तव, माया शंकर सिंह, मेजर साहब यादव आदि ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए उनकी अगवानी की। जिला चिकित्सालय में सभी की थर्मल स्क्रीनिंग कराई गई। इसके बाद उन्हें होम क्वारंटीन में भेज दिया गया।