दहेज एक कुरीति और स्त्री-पुरुष के बराबरी के बीच बाधक है। इसे हर हाल में दूर करना चाहिए। इस काम के लिए महिलाओं को आगे आना होगा। यहत बात अमर उजाला ‘अपराजिता 100 मिलियंस स्माइल्स’ की ओर से शुक्रवार को ‘समाज में महिलाओं की भूमिका और समस्या’ विषय पर संवाद यह बात शहर की प्रबुद्ध महिलाओं ने कही।
सहकारी कालोनी स्थित अमर उजाला कार्यालय पर आयोजित संवाद में चिकित्सक डा. प्रिया पाटिल ने कहा कि सिर्फ दहेज देने ही नहीं बल्कि लेने का भी विरोध करना होगा। तभी इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। पूविवि की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. झांसी मिश्रा ने कहा कि आज लड़कियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। दहेज जैसी कुप्रथा को को खत्म होने से समाज में बेटियों का सम्मान बढ़ेगा।
जेसीआई की अध्यक्ष कल्पना केशरवानी ने कहा कि समाज में दहेज प्रथा बड़ी समस्या है। कहा कि आज कन्या भ्रूण हत्या के पीछे दहेज प्रथा सबसे बड़ा कारण है। घर में जब बेटा पैदा होता है तो उसकी शादी के लिए किसी को उतनी चिंता नहीं होती। लेकिन जब बेटी पैदा होती है तो उसकी शादी में दहेज को लेकर लोगों को चिंता होने लगती है। टीडी कालेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. मधुलिका सिंह ने कहा कि दहेज जैसी कुप्रथा को को खत्म होने से समाज में बेटियों का सम्मान बढ़ेगा। डा. प्रमिला पांडेय, छाया सेठी, डा. छाया सिंह, डा. प्रभा पांडेय, श्रीतिका सिंह, गीता सिंह , मानवी भाटिया , रीता कश्यप, नीतू गुप्ता, अंजू जायसवाल, सविता गुप्ता, गरिमा श्रीवास्तव, ज्योति गुप्ता, नीमा राय आदि ने भी विचार व्यक्त किया।