जौनपुर। कागज में शौचालय बनाकर जिला प्रशासन ने जिले को ओडिएफ घोषित कर दिया है। जबकि मात्र तीन लाख 26 हजार 241 शौचालय ही बने हैं।81 हजार 561 शौचालय अभी भी आधे अधूरे हैं। जिले में स्वच्छ भारत योजना के तहत चार लाख सात हजार 802 शौचालय बनाकर जिले को ओडिएफ किया जाना था।
स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत जिले में कुल चार लाख सात हजार 802 शौचालय बनाकर ओडिएफ किया जाना था। लेकिन जिला प्रशासन ने बिना शौचालय बनवाए ही जिले को ओडिएफ घोषित कर दिया है। जबकि हकीकत यह है कि जिले में अभी 81 हजार 561 शौचालय नहीं बन पाए हैं। सबसे अधिक पांच ब्लाकों में शौचालय आधे-अधूरे बने हुए हैं, जिसमें सुजानगंज, मछलीशहर, बरसठी, खुटहन, महराजगंज ब्लाक है। इन ब्लाकों में लक्ष्य के सापेक्ष 20 फीसदी शौचालय अभी भी आधे अधूरे बने पड़े हैं। इसका अंजादा इसी से लगाया जा सकता है कि डोभी ब्लाक के राजस्व गांव खलियाखास व मनियारेपुर मिलाकर 195 शौचालय का निर्माण होना था। लेकिन मनियारेपुर में 65 शौचालय बनवाकर ओडीएफ घोषित कर दिया गया। वहीं खलिया खास में सौ से ज्यादा शौचालयों का निर्माण अधूरा है। लेकिन इसको भी ओडिएफ घोषित कर दिया गया है। खुटहन ब्लाक के रसूलपुर गांव के पाल बस्ती में छह शौचालय का निर्माण नहीं हो पाया है। अभी तक शौचालय का गड्ढ़ा नहीं बन पाया है। गांव के बलई पाल, प्रकाश पाल ,बाके लाल, प्यारेलाल पाल ने बताया कि इसकी शिकायत भी कई बार अधिकारियों से की लेकिन कोई हल नहीं निकला।
इनसेट:
22 गावों के छह हजार शौचालयों को नहीं भेजी गई है दूसरी किश्त
जौनपुर। जिले में 22 गावों के छह हजार शौचालयों की दूसरी किश्त नहीं भेजा गई है। मात्र पहली किश्त छह हजार रुपये प्रति शौचालय की दर से भेजी गई है। जबकि इतना ही धनराशि की दूसरी किश्त अभी तक नहीं भेजी गई है। जिससे इन गावों में शौचालय का निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ है।
कोट:
जिले को ओडिएफ घोषित करने के बाद तीन माह तक अधूरे शौचालयों को पूर्ण करने का समय दिया गया है। जिसमें अधूरे शौचालयों को पूरा कर लिया जाएगा। लगभग 20 फीसदी शौचालय अधूरे हैं। जिनका निर्माण किया जाना बाकी है। वहीं 22 गांवों के छह हजार शौचालयों को दूसरी किश्त भेजने के लिए शासन से धनराशि की मांग की गई है।
गौरव वर्मा
मुख्य विकास अधिकारी