जौनपुर। गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए घर-घर शौचालय तो बना दिए गए लेकिन इनका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। कोई उनमें भूसा रख रहा है तो कोई उपला। इससे सरकार की मुहिम बेमानी हो गई है। गांवों में ज्यादातर लोग शौचालय होने के बाद भी खुले में शौच जा रहे हैं। जिले के तकरीबन हर गांव में ऐसी ही स्थिति है।
मडिय़ाहूं विकासखंड के चहरपुर गांव में अधिकतर परिवारों के लोग खुले में शौच जाते हैं। गांव में कोई निगरानी टीम नहीं है। कुछ घरों में जहां हाल में शौचालय बना है, वहां भले ही इस्तेमाल हो रहा हो लेकिन पुराने शौचालय तो स्टोर रूम बन गए हैं। उनमें पुआल, उपली और कबाड़ रखा जा रहा है। कुछ में लोग बकरियां बांध रहे हैं। अनिल कुमार व त्रिलोकी के घर पर पांच साल पहले बना शौचालय बेकार हो गया है। त्रिलोकी का कहना है कि एक साल बाद ही शौचालय की बुनियाद बैठ गई वह इस्तेमाल के योग्य नहीं है। शिवमूरत के घर पर बने शौचालय जर्जर हो गया है और लोग इस्तेमाल नहीं करते हैं। मुफ्तीगंज विकास खंड के बारी गांव में अधिकतर लोग खुले में ही शौच के लिए जाते हैं। वर्ष 2014-15 में इस गांव को डा. राममनोहर लोहिया समग्र विकास योजना के तहत चयन किया गया था। उस वक्त यहां घर-घर शौचालय का निर्माण करवाया गया था। पूर्व जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी ने चौपाल लगाकर लोगों से शौचालय के इस्तेमाल की अपील की थी। खुले में शौच करने वालों की निगरानी क लिए युवाओ की टीम गठित की गई थी। कुछ दिनों तक निगरानी चली लेकिन बाद में सब ठंडा हो गया।
जिले में 6.18 लाख शौंचालय का हुआ है निर्माण
तकरीबन 50 लाख की आबादी वाले इस जिले में अबतक छह लाख, 18 हजार पांच शौंचालय का निर्माण सरकारी पैसे से कराया गया है। इसमें 4 लाख 7 हजार 802 शौंचालक का निर्माण चालू वित्तीय वर्ष में अभियान चलाकर किया गया है।
घर घर बने शौंचालय का इस्तेमाल करने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। शीघ्र ही अभियान चलाकर जांच की जाएगी। अगर शौंचाल को कहीं स्टोर रूम के रूप में इस्तेमाल करते पाया गया तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
गौरव वर्मा
मुख्य विकास अधिकारी