स्थानीय तहसील क्षेत्र के सिपाह इब्राहिमाबाद में स्थित 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र के आवासीय भवन काफी जर्जर हो गए हैं। ये भवन और दीवारें इतने जर्जर हो गए हैं कि ये बंदर का वजन भी नहीं सह पा रहे हैं। हैरत की बात यह है कि अधिकारी इतने संवेदनहीन कैसे हो गए हैं कि इन जानलेवा हो चुके भवनों को खतरनाक घोषित न करके इसमें इंसानों को रहने के लिए दिया गया है। अधिकारियों की संवेदनहीनता का ही परिणाम रहा कि दीवारी ढहने से रविवार को एक बालक की मौत और दो बहने घायल हो गई थीं।
इस उप केंद्र पर तत्कालीन उर्जा मंत्री कल्पनाथ राय के प्रयास से 1984 में चार आवास बनाए गए थे। तब से इनकी कभी मरम्मत ही नहीं हुई। 34 सालों में ये आवास काफी जर्जर हो गए हैं। इन आवासों में अब भी विभागीय कर्मचारी रह रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की उपेक्षा से विद्युत कर्मचारी अपने बच्चों के साथ हमेशा मौत के साए में रहने पर विवश हैं। यह भवन इतना जर्जर हो चुका है कि हल्का सा भी धक्का सहन नहीं कर सकता है। यह तो संयोग ही है कि बरसात में ये आवास धराशायी होने से बच गए अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। विद्युत उपकेन्द्र परिसर में बने इन आवासों में रह रहे विद्युत कर्मचारयों का कहना है कि कई बार उच्चाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया किंतु किसी ने ध्यान नहीं दिया।
इस बावत उपजिलाधिकारी निरंकार सिंह का कहना है कि अधिशासी अभियंता ने जर्जर भवनों के बावत शासन को पत्र प्रेषित किया गया है।बजट न मिलने के कारण भवन का निर्माण अधर में लटका है।