जलालपुर।क्षेत्र से गुजरी शारदा सहाय नहर डिगुरपुर रेलवे क्रासिंग के पास शनिवार की रात कटने से सैकड़ों बीघा धान की फसल डूब गई। जिसकी जानकारी किसानों को सुबह हुई। इसके बाद उनके द्वारा नहर विभाग के अधिकारियों को सूचना दी गई। जेर्ठ द्वारा मौके पर पहुंचकर नहर बंधवाने का कार्य किया गया। किसानों ने धान के फसलों की हुई क्षति का मुआवजा देने की मांग की है।
गुजरी शारदा सहाय नहर में क्षमता से अधिक पानी छोड़ दिया गया था। डिगुरपुर रेलवे क्रासिंग की पुलिया में मलबा जमा होने से शनिवार की रात में क्रासिंग से पहले ही नहर कट गई। जिससे जगत दुबे का तीन बीघा,शंकर विश्वकर्मा का पांच बीघा,बृजेश दुबे का चार बीघा,राधे यादव का दो बीघा, चंद्रभूषण मिश्र का एक बीघा,राधेश्याम मिश्र का एक बीघा,प्रेमप्रकाश यादव का छह बीघा,राजमन सरोज का दो बीघा, पिंटू सरोज का दो बीघा,रमेश सरोज को ढाई बीघा,प्रमोद को एक बीघा, कृष्णकांत, प्रमोद पांडेय समेत आदि किसानों की फसल डूबकर बर्बाद हो गई है। किसानों का सैकड़ो बीघा धान की पक कर तैयार फसल डूबकर बर्बाद हो गई। सुबह किसान खेत की तरफ गए तो नहर कटा देखा। जिससे काफी तेजी से पानी खेतों की तरफ जा रहा था। नहर का पानी डिगुरपुर, रेहटी,बेला, ओइना गांव के खेतो में करीब 3 किलोमीटर की रेंज में फैल गया है।ग्रामीण सब काम धाम छोड़कर अपनी फसलों को बचाने के लिए दौड़े पड़े। साथ ही इसकी सूचना नहर विभाग को दिया । इसके बाद भी जेई ने पहुंचकर जेसीबी से टूटी नहर को बंधवाने में जुट गए। उधर किसानों ने नहर विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजा देने की मांग किया है। जेई एसके रावत ने बताया कि वाराणसी के दानगंज तक पानी पहुचाने के लिए ज्यादा पानी छोड़ा गया था। दो वर्ष से नहर की सफाई भी नहीं हुई है। इस लिए पानी उंचाई तक बह रहा था। जिससे कुलावा टूट गया। रेलवे क्रासिंग पर मलबा नहीं जमा हो। इसके लिए जाली लगाने का प्रस्ताव दिया गया।शीघ्र ही क्रासिंग से पहले जाली लगवा दिया जाएगा।