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अंधविश्वास: जिंदा होने के आस में 12 घंटे तक रखा शव

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मछलीशहर। क्षेत्र के भिदुना गांव में सर्पदंश से एक 8 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। मौत के 12 घंटे बाद भी जिंदा होने की आस लिए परिवार के लोग शव को सुरक्षित रखे रहे। शाम को मध्यप्रदेश से दवा लाकर लेप करने के बाद भी जब बालक जिंदा नहीं हुआ तो उसका अंतिम संस्कार किया गया।
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प्रमोद कुमार यादव का आठ वर्षीय पुत्र आदित्य कुमार मंगलवार को स्कूल से वापस घर आकर खाना खा रहा था। वहीं बगल बैठी उसकी मां बसंती देवी कपड़ा ठीक कर रही थी। इसी बीच दीवाल में बने दर्रे से निकला सर्प उसे डस लिया। वह गिर पड़ा। तब तक माता सहित अन्य परिजन भी आ गए तो देखा सर्प बगल के बिल में घुस रहा है। सर्पदंश की बात स्पष्ट होते ही परिजन उपचार के लिए फत्तूपुर लेकर चले गए। वहां उपचार के दौरान हालत विगड़ने पर एंबुलेंस से जौनपुर लेकर गए। अस्पताल में पहुचने से पहले ही बच्चे ने दम तोड़ दिया। फिर भी परिजन जिला अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद मृत बालक का शव लेकर परिजन घर वापस चले आए। मृत बालक के मामा ने फोन से जानकारी दिया कि हरदेव सिंह चौहान जो सपही थाना कुबरी जिला सीधी मध्यप्रदेश में वैद्य हैं वे इस तरह की घटना होने पर कई लोगों को जिंदा कर चुके हैं। मामा ने बच्चे को वहां से दवा लाकर पिलाने की सलाह दी। जिसे सुन परिजन प्राइवेट वाहन से मध्यप्रदेश दवा लाने के लिए रवाना हो गए। बच्चे के शव को सुरक्षित रखा। बुधवार को दवा लाकर बालक को पिलाया गया किंतु दो घंटे तक जब सफलता नहीं मिली तो परिजनों का सब्र टूट गया और घर में कोहराम मच गया। मृत बालक दो बहनों में एकलौता भाई था। उसकी मौत से घर का चिराग बुझ गया। हालांकि ग्रामीणों ने मछलीशहर से एक सपेरे को बुलाकर बिल में घुसे को बाहर निकलवाया। सपेरा उसे लेकर मछलीशहर वापस लौट आया। उधर शाम को परिजनों ने मृत बालक का अंतिम संस्कार किया।
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