जौनपुर । भादोछठ मेले में उमड़ी भीड़ की वजह से रविवार को शाहगंज मार्ग पर पूर्वांचल विश्वविद्यालय के आस पास लंबा जाम लग गया। जिसमें लोग फंस कर परेशान हो गए। पुलिस ने किसी तरह जाम समाप्त करवाया। सरायख्वाजा के ऐतिहासिक भादोछठ मेले की वजह से रूट डायवर्ट पुलिस ने किया था। पूर्वाचल विश्वविद्यालय चैकी के पास से सुबह से भारी वाहनों पर रोक लगा दी। उधर डायवर्जन रूट कुकङीपुर- करंजाकला पर ट्रक फंस गया। जिससे आवागमन बंद हो गया। जाम विवि से लेकर सिद्धीकपुर, खानपुर तक लगा रहा। कोरिडीहा से लेकर जपटापुर तक भारी जाम से लोग परेशान रहे।
मेले में उमड़े हजारों श्रद्धालु
करंजाकला। क्षेत्र के सरायख्वाजा गांव में भादो छठ का मेला रविवार को धूमधाम से मनाया गया। मेले में हजारों आस्थावान पहुंचे। पोखरे में स्नान किया और कढ़ाई चढ़ाई। मेले में जौनपुर के अलावा गोंडा, बहराइच, कानपुर, लखनऊ से आए व्यापारियों ने लकड़ी के सामान की दुकानें लगाई थी, जहां खरीददारों की भीड़ दिखी।
मेले में लकड़ी से बने सामानों की खूब खरीदारी हुई। मेले में सुरक्षा को देखते हुए पुलिस तैनात की गई कई स्वयं सेवी संस्थाओं ने स्टाल लगाकर लोगों को सहायता की। ऐसी मान्यता है कि सरायख्वाजा गांव स्थित पोखरे में स्नान करने से चर्म एवं कुष्ठ रोगों से छुटकारा मिल जाता है। तमाम लोगों ने पोखरे में स्नान कर कड़ाही चढ़ाई। कानपुर के व्यवसायी इस्लाम अहमद ने बताया कि वह कई साल मेले में लकड़ी से बनी चौकी, मचिया, चारपाई आदि की दुकान लगाते हैं। टांडा के व्यापारी मंसूर आलम और गोंडा का व्यापारी दयाशंकर यादव ने बताया कि उन्होंने मेले में बच्चों के लिए झूला और लकड़ी से बने सामानों की दुकान लगाया है। हर वर्ष वह मेले में दुकान लेकर आते हैं। पन्नालाल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जनकल्याण समिति के अध्यक्ष शिवा वर्मा की देखरेख में स्टाल लागाकर लोगों को पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई। बसपा नेता विवेक यादव ने स्टाल का उद्घाटन किया। ज्योति वर्मा ने आभार जताया। मेले में देर शाम तक लोग मेले में खरीदारी करते रहे। ऐसी मान्यता है कि सरायख्वाजा गांव के पोखरे में पांच वर्ष तक लगातार स्नान करने से बीमारियों से मुक्ति मिल जाती है। मेले में किसानों के लिए लकड़ी से हल, जुआठ, चौका, बेलना, चारपाई, दौरी आदि की खरीदारी की। मेले में कई संस्थाओं ने स्टाल लगाकर लोगों का सहयोग किया।
मनाया गया सूर्यदेव का जन्मदिन
मछलीशहर। क्षेत्र में सूर्यदेव का जन्मदिन बड़का इतवार के रूप में मनाया गया। भादों माह में हरितालिका तीज के बाद पड़ने वाले रविवार को सूर्यदेव के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त दिनभर व्रत रखते हैं। सूर्य को अर्ध्य प्रदान किया जाता है। दिनभर व्रत रखते हुए सायंकाल बिना नमक का एक अन्न भोजन स्वरूप ग्रहण करने की परंपरा है। रविवार को उक्त पर्व पूरी श्रद्धा के साथ क्षेत्र में मनाया गया।