जौनपुर। प्रख्यात कवि और बिजली कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष स्व.गिरिश सिन्हा के पूण्य तिथि पर कोशिश संस्था द्वारा सोमवार को संस्था कार्यालय पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें कवि व शायरों ने स्व.गिरिश सिन्हा को श्रद्घांजलि अर्पित की। साथ ही उनके सम्मान में अपनी -अपनी रचनाए प्रस्तुत की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व प्राचार्य डा.अरुण कुमार सिंह ने जीवन का मानव मूल्यों का कवि बताते हुए किया। प्रोफेसर अनुप बशिष्ठ ने उनकी कृतियों पर और शोध कार्य की बात कही। काव्य गोष्ठी का शुभारंभ अजय कुमार की अध्यक्षता में वाणी बंदना से की गई।
अहमद निसार ने अपनी प्यास कहां ले जाऊं,हर दरिया पर नाम लिखा है सुनाकर समाज की सरंचना पर प्रकाश डाला। अशोक मिश्र ने वह मुण्को आशीषती सिर पर आंचल डाल, कहां बलाए ठहरती मां गन जाती ढ़ाल सुनाकर मां के महत्व को बताया। जनार्दन अस्ठाना ने जी करता है आगे बढ़कर आगवानी कर लूंमन मानी कर लूं सुनाकर श्रोताओं के मन में कोमल भाव जगाया। आकिल ने हो गई है खता पड़ी मुझसे को खूब पसंद किया गया। रामजीत मिश्र ने बहाने पर बहाने ढूढ़ लेता हैसुनाकर राजीनीति के उपर प्रहार किया। अनूप बशिष्ठ ने किसी के कान की पीतल की बाली याद आती है सुनाया। इस अवसर पर प्रोफेसर पीसी विश्वकर्मा, बीडी मिश्र, डा.बदीबा, अनिल उपाध्याय, अमृत प्रकाश, आशुतोष, बृजेश , समीर प्रोफेसर आरएन सिंह व आलोक सिन्हा आदि उपस्थित रहे।