फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चिकित्सकों की चार टीमें मवेशियों का कर रही इलाज

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
खुटहन। क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में खुरपका, व मुंहपका बीमारियों से पीड़ित मवेशियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पहले चार गांवों में सौ के आस-पास मवेशी पीड़ित चल रहे थे। गांव में चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया तो अब बगल के दो गांवों के दर्जनों और मवेशी भी इस बीमारी की चपेट में आ गए। अब पीड़ित पशुओं की संख्या डेढ़ सौ के पार पहुंच गई है। फिलहाल चिकित्सकों की चार टीमें रात दिन गांव में जमी हुई हैं। उनका दावा है कि शनिवार तक इस पर पूरी तरह से नियंत्रण कर लिया जाएगा।
ढेसुर ताल के बगल के गांव लवायन, बीरी, अहीरखेतार, बेगराजपुर में सर्वप्रथम खुरपका मुंहपका बीमार का लक्षण मवेशियों में दिखाई पड़ा। धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ कर सौ से अधिक हो गई। मवेशियों में दो गायों की मौत हो चुकी है। जिससे ग्रामीण भयभीत हो गए हैं। पहले तो वह घरेलू नुस्खे से उपचार शुरू किए। कोई फायदा नहीं होने पर चिकित्सकों को सूचना दी। तब तक यह रोग महामारी का रूप धर चुका था। चार गांवों के सौ से अधिक पशु पीड़ित हो चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

गुरुवार को विभिन्न चिकित्सालयों पर तैनात चार चिकित्सकों को टीम को उपचार के लिए लगा दिया गया। चारों गांवों में पशुओं के प्राथमिक उपचार पूरा हुआ था कि बगल के जमुहरा और दरना गांव में भी दर्जनों मवेशी पीड़ित होने की सूचना मिली। शुक्रवार को चारों टीमें उक्त दोनों गांवों के पशुओं के उपचार में लगी हुई हैं। पीड़ित पशुपालक बिंदू यादव, फुर्ती यादव, रिंकू उपाध्याय, पन्नालाल, प्रज्ज्वलित, अंकेश दूधनाथ, मदन आदि ने बताया कि चिकित्सकों के उपचार शुरू करने के बाद पशुओं की बीमारी पर नियंत्रण हैं। खुटहन के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. चंद्रभान का कहना है कि इस रोग का तेजी से बढ़ने का मुख्य कारण ढेसुर का ताल है। जहां सभी मवेशी एक साथ चरने के लिए लाकर छोड़ दिए जाने से छुआछूत से यह रोग महामारी की तरह बढ़ गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें