जलालपुर। क्षेत्र के नहोरा डीह गांव निवासी एक 18 वर्षीय युवक मंगलवार शाम गांव के पास सई नदी में स्नान करते समय डूब गया था। जिसका शव घटना के 20 घंटे बाद बुधवार को क्षेत्र के लालपुर घाट पर मिला। इसके बाद प्रशासन ने राहत की सांस लिया।
सूर्य प्रताप सिंह घर से करीब आधा किमी दूर हनुमान मंदिर के पास अपने तीन साथियों ज्वाला, अजय व विजय के साथ शाम को कबड्डी खेल रहा था। इसके बाद चारों युवक सई नदी में स्नान करने चले गए। तैरते हुए चारों नदी के उस पार चले गए। वापस लौटते समय अजय व विजय तैरकर आगे निकल गए इनके पीछे ज्वाला व सूर्य प्रताप आ रहे थे। नदी के बीच धारा में पहुंचते ही सूर्य प्रताप थकान की वजह से पानी के तेज बहाव में बह गया था। जिसका शव नदी में बहते हुए घटना स्थल से करीब छह किलो मीटर दूर लालपुर घाट पर बुधवार को करीब साढ़े 12 बजे मछली मार रहे युवक ने देखा। अन्य मछुआरों की मदद से नाव से पीछा कर दो सौ मीटर दूर युवक के शव को पकड़ कर बाहर निकाला गया। घटना की सूचना पुलिस को दिया। सूचना मिलते ही पुलिस व परिजनों समेत ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठा हो गई। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एसडीएम मंगलेश दूबे का कहना है कि गोताखोरों की मदद से शव की तलाश की गई।
जलालपुर। क्षेत्र के नहोरा डीह निवासी मृतक सूर्य प्रताप परिवार के साथ दिल्ली रहकर पढ़ाई करता था। वह दो भाई एक बहन में सबसे बड़ा था। पढ़ाई के साथ सिविल की तैयारी भी कर रहा था। दिल्ली से एक सप्ताह पूर्व घर आया था। परिजन दिल्ली में ही थे उसे क्या पता था कि अब वापस दिल्ली नहीं जा पाएगा। उसके घर आने पर बड़े पिता राय साहब सिंह व अन्य परिजनों के साथ लोग खुश थे। लेकिन खुशी मातम में तब बदल गई जब दोस्तों के साथ खेलने के लिए हनुमान मंदिर पर गया और खेल के बाद नहाते समय डूब जाने की खबर दोस्तो ने परिजनों दी। सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। लोग भागे-भागे घटनास्थल पर पहुंचे। वहां पुलिस की मदद से गोताखोरों द्वारा देर रात तक ढूंढने का क्रम जारी रहा लेकिन सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। बुधवार की दोपहर करीब 20 घंटे बाद शव घर से लगभग 10 किमी दूर लालपुर घाट पर मिला। घटना के बाद परिवार का कोई हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था कि दिल्ली में रह रहे उसके माता पिता को घटना की सूचना दे सके। परिजनों ने किसी तरह मृतक के पिता को घटना के बारे में बताया। जानकारी होते ही उसके माता-पिता समेत परिवारवालों का रो रोकर बुरा हाल है।