केराकत। अधिवक्ताओं द्वारा निजी कर्मचारियों को भगा दिए जाने से शनिवार को तहसील परिसर में सन्नाटा छाया रहा। रजिस्ट्रार कानूनगो दफ्तर, नायब तहसीलदार न्यायालय और तहसीलदार कोर्ट का ताला एक बजे तक बंद रहा। इससे वादकारियों को मायूस होकर बैरंग वापस लौटना पड़ा। वहीं, एसडीएम ने बार अध्यक्ष को सशर्त वार्ता के लिए पत्र लिखा है।
तहसील के कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर बार और बेंच में पिछले डेढ़ महीने से तनाव चल रहा है। अधिवक्ताओं की शिकायत है कि बेंच कार्यालयों में घूसखोरी और भ्रष्टाचार बढ़ गया है। इसे लेकर अधिवक्ता पिछले डेढ़ महीने से हड़ताल पर है। शुक्रवार को अधिवक्ताओं के तेवर उग्र हो गए। उन्होंने तहसील कार्यालयों में काम करने वाले करीब डेढ़ दर्जन निजी कर्मचारियों को भगा दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि शनिवार को तहसीलदार, नायब तहसीलदार समेत कई कार्यालय में ताला बंद रहा। वहीं, तहसील कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा। इस संबंध में उप जिलाधिकारी मंगलेश दूबे का कहना था कि सभी अधिकारी थाना समाधान दिवस में व्यस्त रहे। इस कारण कार्यालय नहीं पहुंच सके। इसी बीच, एसडीएम मंगलेश दुबे ने बार अध्यक्ष को बातचीत के लिए सशर्त पत्र लिखा। सशर्त वार्ता की पेशकश से अधिवक्ता और गुस्से में दिखे। शनिवार की शाम कोतवाल शशिभूषण राय ने महामंत्री हीरेंद्र यादव और अध्यक्ष नम: नाथ शर्मा को फोन कर कहा कि आप लोगों के विरुद्ध सरकारी काम में बाधा पहुंचाने की शिकायत मिली है। इससे अधिवक्ता और नाराज हो गए। महामंत्री हीरेंद्र यादव का कहना था कि एक तरफ वार्ता की पेशकश और दूसरी तरफ पुलिस से शिकायत की जा रही है। कोतवाल शशिभूषण राय ने कहा कि नायब तहसीलदार की ओर से शिकायत की गई है लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है।