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बारिश न होने से सूख जाएंगी बोई गई फसलें

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जौनपुर। पहली बारिश में ही खरीफ के फसलों की बुवाई कर चुके किसान परेशान हैं । इस समय बारिश नहीं होने से उनको फसल बर्बाद होने की चिंता सताने लगी है। उनको इस बात की चिंता है कि उनके खेत की जुताई का पैसा और बीज दोनों बर्बाद हो जाएगा। जिले में अभी तक 15 फीसदी भूमि पर खरीफ के फसलों की बुआई की गई है।
जिले में छह लाख 55 हजार किसान हैं।खरीफ की फसल के बुआई का लक्ष्य जिले में दो लाख 29हजार हेक्टेयर भूमि रखा गया है। जिसमें से एक लाख 59 हजार हेक्टेयर भूमि में केवल धान की खेती किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।शेष बचे भूमि पर खरीफ की अन्य फसलें बोने का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक जिले में लगभग 15 फीसदी भूमि पर खरीफ के फसलों की बुआई हुई है। बारिश होने से पहले सरकारी बीज गोदामों व प्राइवेट दुकानों से ज्वार, मक्का व धान आदि के बीज ले लिया था। जैसे ही पहली बारिश हुई किसानों के खुशी का ठीकाना नहीं रहा। किसान ज्वार, मक्का, उड़द की बुआई कर दिए। साथ ही धान की नर्सरी भी डाल दी।इसके बाद इंद्र देव के मेहरबान नहीं होने से किसानों की खुशियां धिरे-धिरे काफूर होती चली गई। हालत यह हो गई बारिश नहीं होने से धरती की कोख सूख रही है। वहीं किसानों को फसलों के बर्बाद होने की चिंता सताने लगी है।
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जौनपुर। कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा के वैज्ञानिक सुरेश कन्नौजिया ने बताया कि पहली बारिश में ही किसान 10 फीसदी भूमि पर खरीफ के फसलों की बुआई कर चुके हैं।अगर 10 दिन के अंदर पानी नहीं बरसा तो बोई गई फसलें सूख जाएंगी। उन्होंने कहा कि किसान हल्की सिंचाई कर फसलों को सूखने से बचा सकते हैं। इसके लिए वे स्प्रिंकलर पद्घति से भी सिंचाई कर सकते हैं।
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