जौनपुर। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में तैनात लिपिकों की ताकत का इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि डीएम के निर्देश और शिक्षकों के प्रदर्शन के बाद लिपिकों का पटल तो बदला गया लेकिन उन्हें हटाकर दूसरे को पटल देने की बजाय उन्हीं के बीच इधर से उधर मलाईदार पटल को बांट दिया गया। इसकी चर्चा विभाग में जोरों पर है।
लंबे समय से एक ही पटल पर जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में बाबू जमे थे। इनके द्वारा कई तरह की अनियमितता बरती जा रही थी। पीडब्लूडी डाक बंगले में मंत्री, सांसद, विधायकों और भाजपा संगठन के पदाधिकारियों ने डीएम से शिकायत किया था। जिसके बाद डीएम ने बुधवार को जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय का निरीक्षण कर तकरीबन 20 का वेतन रोकने का निर्देश दिया था। गुरूवार को माध्यमिक शिक्षक संघ ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर एक लिपिक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस लिपिक द्वारा एक शिक्षक से पैसे मांगे जा रहे थे। दोनों घटनाओं के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक ने पटल में परिवर्तन का कोरम पूरा किया है। उन्होंने बताया कि पंकज यादव से शाहगंज तहसील और चयन बोर्ड हटा लिया गया है। उन्हें केराकत तहसील की जिम्मेदारी दी गई है। रूद्र पाल से मान्यता और बोर्ड परीक्षा हटाकर मछलीशहर तहसील दी गई है। अरुण श्रीवास्तव से सदर तहसील हटाकर बोर्ड परीक्षा और शाहगंज तहसील की जिम्मेदारी दी गई है। सहभान अली से केराकत तहसील हटाकर सदर तहसील की जिम्मेदारी दी गई है। अखिलेश मौर्या से बदलापुर हटाकर मान्यता की जिम्मेदारी दी गई है। रामभुवन से मछलीशहर हटाकर बदलापुर दिया गया है। सूत्रों की माने तो जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में 17 लिपिक तैनात हैं। कुछ लिपिकों के पास कोई जिम्मेदारी नहीं है। सिर्फ सात-आठ लिपिकों के बीच पूरा पटल की जिम्मेदारी है।