जौनपुर। तारीख पर तारीख। राजस्व के मुकदमों का यही हाल है। इससे अधिवक्ता भी दुखी हैं। उनका कहना है कि 1962 तक के मुकदमे लटके हुए हैं। कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर मामलों के त्वरित निस्तारण की मांग की है।
शुक्रवार को तारीखों में उलझी न्याय की उम्मीदें शीर्षक से अमर उजाला में खबर छपने के बाद कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति ने बैठक की। उसके बाद
न्यायिक प्रक्रिया में विलंब होने पर आक्रोश जताते हुए डीएम को एक पत्रक सौंपा। कहा कि 12 अप्रैल को जिले की प्रभारी मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी से राजस्व संबंधी मुकदमों के तेजी से निस्तारण की मांग की थी। कहा था कि अदालतों में पीठासीन अधिकारियों के नियमित रूप नहीं बैठने के कारण मुकदमे लंबित हैं। इनके निस्तारण की व्यवस्था की जानी चाहिए। कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति के अध्यक्ष विजय प्रताप सिंह का कहना है कि राजस्व संहिता की धारा 24 की कार्रवाई होने के बाद पैमाइश करने में राजस्वकर्मी मनमानी करते हैं। महामंत्री ओम प्रकाश सिंह का कहना है कि नक्शा दुरुस्ती का मामला 15 दिन में स्तिारित हो जाना चाहिए लेकिन वर्षों तक पत्रावलियां लंबि तरहती हैं। दो-दो साल तक रिपोर्ट नहीं आती और मुकदमे का फैसला नहीं हो पाता है। अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह व पूर्व अध्यक्ष रामकृष्ण पाठक का कहना है कि संपूर्ण समाधान दिवस और शिकायती प्रकोष्ठ में दिए गए प्रार्थना पत्र भी राजस्व विभाग में लंबित रहते हैं। पूर्व महामंत्री घनश्याम सिंह का कहना है कि अभिलेखागार में तमाम अभिलेख गायब हो गए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता राकेेश कुमार सिंह का कहना है कि अधिकारियों की रुचि राजस्व मुकदमों को निस्तारित करने में नहीं रह गई है। अधिवक्ता आनंद मिश्रा का कहना है कि अफसर इन सबसे अवगत हैं फिर भी चुप्पी साधे हैं। डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी का कहना है कि लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण का निर्देश सभी अधिकारियों को दिया गया है।