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सई नदी के अस्तित्व को बचाने पर हुआ मंथन

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मीरगंज/जौनपुर। बसुही नदी धीरे-धीरे अस्तित्व खोती जा रही है। नदी के किनारे कब्जे होते जा रहे हैं और लोग गंदा पानी भी छोड़ रहे हैं। इससे नदी नाले में तब्दील हो गई है। करनौली रामपुर ताल से निकलने वाली वसुही नदी भदोही के सीमा पर वरुणा नदी में समाहित हो जाती है। बसुही की बदहाली का असर वरुणा पर भी पड़ा है।
मादरडीह टीले के निकट से गुजरने वाली नदी बसुही कभी पानी से लबालब भरी रहती थी। इनदी का उद्गम जौनपुर व प्रतापगढ़ सीमा से सटे रामपुर ताल से हुआ है। सुजानगंज के करनौली, मुंगराबादशाहपुर के मादरडीह, सतहरिया तथा पंवारा के बामी व मीरगंज के बंधवाबाजार, बरसठी के रायपुर गांव, जमालापुर होते हुए रामपुर क्षेत्र की वरुणा नदी में समाहित हो जाती है। यह नदी जिले में तकरीबन 50 किमी दूरी तय करती है। बसुही नदी के बदहाली का आलम यह है कि नदी में बरसात के मौसम के बाद इसमें पानी नहीं रहता। नदी को धीरे-धीरे लोग पाटने लगे हैं। गांवों का गंदा पानी भी नदी में बहाया जाने लगा है। ससे नदी में बहने वाला जल प्रदूषित है। इसका उपयोग किसी भी लायक नहीं है। आसपास के गांवों के लोग नदी की भूमि कब्जा करने लगे हैं। चौकीखुर्द गांव के टीएन पांडेय का कहना है बसुही नदी सिर्फ बरसात की जल निकासी का नाला बनकर रह गई है। चितांव व चौकीखुर्द गांव के बरसात का पानी बनई नाले के माध्यम से बसुही नदी में पहुंचता है। बरसात के बाद इसमें कही से पानी नहीं पहुच पा रहा है। इसे नहर से जोड़ने की आवश्यकता है। रिटायर्ड अध्यापक रामनरेश यादव ने चिंता जताई कि नदी की सफाई नहीं होने से यह सिकुड़ती जा रही है। 1955 में बसुही नदी में इतनी भयंकर बाढ़ आई थी कि बंधवा बाजार से लेकर चितांव मुड़ाव 10 किमी तक लोगों को नाव से आना जाना पड़ता था। लोग इससे धान की सिंचाई करते थे। आज स्थिति है कि शासन प्रशासन के उपेक्षा के कारण नदी सिकुड़ गई है। नदियों की खुदाई की जानी चाहिए और उसमें पानी भरा जाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है जिससे पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। प्राथमिक शिक्षक संघ के मछलीशहर अध्यक्ष रोहित यादव का कहना है कि बंधवा बाजार के अगल बगल बसुही नदी पर कब्जा किया जा रहा है। बंधवा बाजार बड़ी बाजार होने से भू माफिया सड़क के बगल की नदी की जमीन को पाटकर कब्जा कर रहे हैं। यही स्थिति लगभग हर जगह है जिससे नदी का अस्तित्व संकट में पड़ गया है।
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सई को बचाने पर हुआ मंथन
सिकरारा। शेरवा बाजार के अंबिका सदन में शुक्रवार को व्यापारियों, युवाओं , सामाजिक संगठनों की बैठक में सई को बचाने की मुहिम छेड़ने का निर्णय लिया गया।
अमर उजाला की ओर से नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए चलाए जा रहे अभियान की सराहना करते हुए लोगों ने कहा कि इस नदी लोगों के जीवन में विशेष अहमियत है। हीरापुर के लोक गायक छवि राज सरोज ने कहा कि नदी प्रकृति का सुंदर वरदान है। कभी इसके पानी में लोग स्नान करते थे लेकिन आज स्थिति शोचनीय है। इंटर कालेज शेरवा के पूर्व उप प्रबंधक विनय सिंह ने कहा कि नदी में प्लास्टिक की थैलियां फेंकना बंद किया जाए। किसान बब्बन सिंह ने कहा कि नदी की ड्रेजिंग हो जाएगी। फार्मासिस्ट अशोक सिंह भोले व पूर्व बीडीसी सदस्य वीके सिंह ने कहा कि प्रतापगढ़, उन्नाव रायबरेली में कारखानों का अपशिष्ट और गंदे पानी को नदी में छोड़ने से रोकने की मांग की। मुन्ना सिंह ने चेक डैम बनाने की सलाह दी। सधई शर्मा ने कहा कि एक संघर्ष समिति का गठन होना चाहिए, जो लगातार संघर्ष करे। व्यापारी अरविंद ने नदी के संरक्षण की शपथ दिलाई। अध्यक्षता शिक्षक लल्लन उपाध्याय ने की।
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