सिरकोनी। काशी आचार्य प्रमोद त्रिवेदी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा हमें प्रेरणा देती है। उनकी कहानियों से जीवन को जीने की कला आती है। कोई अमृत भी पी ले लेकिन जीवन में बदलाव न हो उसका अमर होना निरर्थक हो जाता है। वह ताला मझवारा गांव में अमला पांडेय के आवास पर श्रीमद्भागवत पर प्रवचन कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि धुंधकारी जैसे पापी भी कथा को सुनकर मोक्ष को प्राप्त हो गए। भागवत कथा अमृत सामान है। राजा परीक्षित अपने जीवन के अंतिम सात दिन कथा श्रवण में बिताया और पुण्य के भागी बने। कलियुग में भगवत प्राप्ति के लिए अत्यंत सरल मार्ग हैं। नाम मात्र का जाप करने से कलियुग में मुक्ति का विधान है। राजेश रत्नाकर, राजीव झा, लालबहादुर रसिक की मंडली ने भजनों का गायन किया। आचार्य श्री कमलाकांत मिश्रा, रजनीश पाठक आशीष पांडेय के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गणेश वंदना व पोथी पूजन किया। राधेश्याम चौबे, अवधेश पांडेय, प्राणनाथ, महाप्रसाद, हरिशंकर सूर्यनारायण, हुब्बू पांडेय, शीतला पांडेय, अरुण रमेश, शुशील आदि मौजूद रहे।