जौनपुर। गोमती नदी गर्मी में सूख गई है। नालों के दूषित पानी से नदी नाले में बदल गई है। नदी के तट पर दुर्गंध से जीना दुश्वार हो जा रहा है। नदी का हाल चिंताजनक हो गया है। इसकी बदतर हालत को देखते हुए शुक्रवार को प्रमुख सचिव सिंचाई के यहां मंथन हुआ। इसमें जल निगम और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को भी बुलाया गया था। नदी के हाल पर समीक्षा की गई। अभियंताओं ने बताया कि इसके बाद जल संसाधन मंत्रालय में दिल्ली में बैठक होनी है।
गोमती नदी पीलीभीत से 32 किमी दूर पूरब दिशा में ग्राम बैजनाथ की पुलहर झील गोमती का उद्गम स्थल है। वहां 900 किमी सफर तय कर यह नदी जौनपुर होते गाजीपुर जिले के कैथी में गंगा में विलीन हो जाती है। नदी में प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। सभी नालों का गंदा पानी नदी में गिरना है। स्थानीय प्रशासन प्रदूषण से निपटने में अपने को असहाय महसूस कर रहा है। नदी के पानी में आक्सीजन की मात्रा करीब-करीब समाप्त हो गई। यही कारण है कि मछलियां मरने लगी हैं। गोमती अपने अस्तित्व बचाने के लिए लड़ाई लड़ रही है। गर्मी में नदी सूख कर दुबली हो गई है। लोग इस पर अतिक्रमण करने लगे हैं।
पर्यावरणविदों के मुताबिक पहले गोमती अपने साथ बालू, मृदा आदि लेकर आती थी। बरसात में अपना भार बाढ़ के डूबे क्षेत्र में छोड़ती हुई आगे बढ़ जाती थी। बालू और कंकड़ की जमा परतें भूजल को रिचार्ज करती थीं। मगर नाले के गद से नदी पट गई है। नदी के किनारे लोग शौच कर गदंगी कर रहे हैं। नदी के गाद से पट जाने के कारण बारिश के दिनों में वह विकराल रूप धारण कर लेती है और बाढ़ से लोग तबाह हो जाते हैं। पर किसी को इसकी चिंता नहीं है। नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने नदी में गिरने वाले नालों को रोकने की बात कही थी लेकिन अभी इस पर ठोस पहल नहीं हुई है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगा है लेकिन चल नहीं रहा है।