जौनपुर। तत्कालीन डीआईओएस भाष्कर मिश्र व लिपिक समेत पांच के खिलाफ दायर धोखाधड़ी व जालसाजी के मुकदमे में सीजेएम ने पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया कि कोतवाल से मामले की जांच कराकर बिंदुवार आख्या 29 मई को कोर्ट में पेश करें। पूर्व में कोर्ट ने कोतवाल को जांच का आदेश दिया था लेकिन कोतवाल ने आदेश का पालन नहीं किया।
भूपेंद्र प्रताप सिंह निवासी बसारतपुर थाना बक्सा ने कोर्ट में धारा 156 (3) के तहत तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक भाष्कर मिश्र, लिपिक अरुण श्रीवास्तव समेत पांच के खिलाफ षड़्यंत्र, धोखाधड़ी व कूट रचना करने का प्रार्थना पत्र दिया कि वह आदर्श इंटर कॉलेज शंभूगंज की स्थापना किए। गांव के लाल प्रताप (अब मृत) ने कूट रचना व जालसाजी करके विद्यालय का प्रबंध तंत्र अपने हाथ में ले लिया और प्रबंधक बन बैठे। वह तथा उनके रिश्तेदारों ने वित्तीय अनियमितता किया। 22 मई 2016 को तत्कालीन डीआईओएस ने समय पर प्रबंध समिति का चुनाव न किए जाने एवं सोसायटी के नवीनीकरण न होने के कारण प्रबंध समिति को कालातीत मानते हुए प्रबंधक द्वारा संचालित खातों पर रोक लगा दिया। संयुक्त शिक्षा निदेशक वाराणसी को संस्तुति पत्र भेजा। संयुक्त निदेशक द्वारा प्रबंधक से स्पष्टीकरण मांगा गया। स्पष्टीकरण न देने पर 9 जून 2017 को उन्होंने प्रबंधकीय अधिकारों को अतिक्रमित करते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक के आदेश की पुष्टि कर दी। इसी बीच आरोपियों ने पद का दुरुपयोग कर 16 दिसंबर 2016 को प्रबंध समिति को मान्यता देते हुए बिना कारण दर्शित किए 22 मई 2016 के आदेश को वापस ले लिया।