मीरगंज (जौनपुर)।
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिला सुकमा में गुरुवार को बारूदी सुरंग में विस्फोट से जिले का एक और लाल शहीद हो गया। मछलीशहर तहसील क्षेत्र के करियांव गांव निवासी स्व. जिलाजीत बिंद के दूसरे पुत्र राजेश बिंद सीआरपीएफ में एसआई के पद पर सुकमा में तैनात थे। वह 206 कोबरा बटालियन के जवान थे। राजेश के शहीद होने की खबर तो पूरे इलाके में फैल गई लेकिन घर में सिर्फ महिलाएं होने के चलते उनसे यह बात छिपाकर रखी गई है। उन्हें बताया गया है कि राजेश नक्सली हमले में घायल हो गया है लेकिन घर पर अधिकारियों की गाड़ी और लोगों की भीड़ को देखकर महिलाएं किसी अनहोनी की आशंका में परेशान होकर विलख रही हैं। वैसे देर रात शहीद का शव गांव में पहुंचने की संभावना है।
मीरगंज के करियांव गांव निवासी राजेश कुमार बिंद 2006 मे सीआरपीएफ में कांस्टेबल पद पर भर्ती हुए थे। 2012 मे विभागीय परीक्षा के बाद राजेश की तैनाती एसआई के पद पर हो गई थी। मौजूदा समय में वह छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिला सुकमा में तैनात थे। गुरुवार को सुबह नक्सली हमले मे वह घायल हुए और इलाज के दौरान मौत हो गई। सोशल मीडिया पर उड़ती खबर दोपहर एक बजे तक पड़ोसियों तक पहुंच गई। तीन बजे एसडीएम मछलीशहर जगदंबा सिंह, सीओ मछलीशहर और एसओ मीरगंज पन्नेलाल, सांसद प्रतिनिधि राजेश सिंह शहीद के घर पहुंचे। शहीद के घर पर पहले से ही लोग जमा हो गए थे। लोगों ने एसडीएम और एसओ को बताया गया कि घर में सिर्फ महिलाएं हैं। इस नाते परिवार वालों को सिर्फ घायल होने की जानकारी दी गई है। राजेश चार भाइयों में दूसरे नंबर का था। बड़ा भाई सुरेश मुंबई में इंजीनियर के पद पर तैनात हैं। राजेश से छोटा भाई विश्वनाथ रेलवे में तथा सबसे छोटा आशीष आगरा में पढ़ाई कर रहा है। उसकी तीन बहनें अनीता, मनीषा, सुनीता हैं। राजेश की शादी मीरगंज थाना क्षेत्र के जगदीशपुर गांव में 2006 में ऊषा देवी के साथ हुई थी। वह तीन बच्चों के पिता थे। शहीद राजेश का बड़ा बेटा अमन (10), पुत्री मीनाक्षी (5) और सोनाक्षी दो वर्ष की है। राजेश के पिता की मौत 2012 में हो गई। घर पर मां प्रभावती, पत्नी ऊषा के अलावा भाभी और भयोहू हैं।
मछलीशहर। नक्सली हमले में शहीद राजेश बिंद छह माह पहले अपने घर आए थे। उनसे समाचार पत्र विक्रेता लाल प्रताप ने पूछा कि आपसे फिर कब मुलाकात अगली बार होगी तो राजेश ने कहा था कि जवानों से फिर मुलाकात की कोई गारंटी नहीं होती है। वैसे यह बात राजेश ने मजाक के तौर पर किया था। उसे क्या पता था कि उसकी यह जुबान एक लकीर बन जाएगी। राजेश की मुलाकात तेरहवीं के भोज में लाल प्रताप से हुई थी। बातचीत में राजेश ने कहा था कि जवानों की जिंदगी जोखिम भरी होती है। ड्यूटी पर जाने के बाद फिर मिलने की कोई गारंटी नहीं होती है। सुकमा में हुई घटना में राजेश के शहीद होने पर उसके घर पहुंचे लाल प्रताप रो रो कर यह बात दोहरा रहे थे। मीरगंज प्रतिनिधि के मुताबिक, जवान राजेश बिंद काफी विनम्र व मृदु स्वभाव के थे।
मीरगंज। नक्सली हमले मे शहीद राजेश बिंद का शव देर रात तक घर पहुंचने की संभावना है। इसकी जानकारी वहां अधिकारियों ने पत्र से सूचित कर दिया है। सुकमा हमले में शहीद राजेश बिंद का शव रात आठ बजे लखनऊ एयरपोर्ट पर पहुंचेगा। उसके बाद सड़क के रास्ते सीधे जवान के घर मीरगंज लाया जाएगा। उनके साथ सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी भी पहुंच रहे हैं। देर रात तक शव पहुंचने की संभावना है। उधर, मुंबई में रह रहे शहीद के दोनों भाई हवाई जहाज से देर शाम तक आठ बजे तक बाबतपुर पहुंचेंगे। वहां से दोनों भाई रात नौ बजे तक घर पहुंचेंगे।