जौनपुर। शाही किला और डीएम आवास को छोड़ दें तो शहर में कहीं भी पेड़ नहीं बचे हैं। सड़कों के चौड़ीकरण के लिए तमाम पेड़ काट दिए गए। सड़क किनारे कहीं भी छाया है, जहां राहगीर सुस्ता सकें। अब प्रशासन को शहर में हरियाली की चिंता सताने लगी है। प्रथम चक्र में 500 नीम के पेड़ लगाने की तैयारी है। वन विभाग एवं नगरपालिका के अधिकारी इसके लिए जगह चिह्नित कर रहे हैं।
वाजिदपुर से गोमती नदी तक दोनों तरफ पीडब्लूडी की भूमि है। इस पर फोर लेन सड़क बनाई जा रही है। इस जमीन पर एक भी पौधे नहीं हैं। थोड़ी बहुत हरियाली थी भी तो वह 220 फुट चौड़ी सड़क की भेंट चढ़ गई। पूरी सड़क वीरान दिखती है। शहर के भीतर की सड़कों की भी हालत खराब है। उसमें कुछ लोगों को छोड़ दिया जाए तो किसी ने कोई पौधा नहीं लगाया है। वीआईपी कालोनी तारापुर में एक मकान में हजार फुट क्षेत्रफल में पौधे लगे हैं। ऐसे अपवादों को छोड़ दिया जाय तो ज्यादातर घरों में लान हैं ही नहीं। सड़कों पर भी पेड़ नहीं हैं। बदलापुर पड़ाव से कचहरी रोड पर इक्का-दुक्का जगहों पर भी पेड़ हैं। पालिटेक्निक से कोतवाली चौराहे तक सड़क पर एक भी पेड़ नहीं है। डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी भी मानते हैं कि पेड़-पौधों की कमी से शहर की आबोहवा पर असर पड़ रहा है। उन्होंने इसको देखते हुए शहर में बड़े पैमाने पर पौधे लगवाने की योजना बनाई है।
डीएफओ एपी पाठक ने बताया कि जन सहयोग से प्रथम चक्र में 500 नीम के पौधे लगाएं जाएंगे। सामाजिक व व्यावसायिक संस्थानों के सहयोग से पौधरोपण करने की योजना है। एक संस्था या व्यक्ति को कम से कम 10 पौधे लगवाने को कहा जाएगा। इसे लगाने और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी उन्हीं की होगी। इसके लिए 100 से अधिक लोगों की सूची तैयार की गई है।
शहर की सड़कें बीरान दिखती है। इससे पर्यावरण का संकट है। ऐसे में शहर को ग्रीन सिटी के रूप में तब्दील करने का प्रयास शुरू किया जा रहा है। वन विभाग को पौधरोपण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस नेक कार्य में सामाजिक संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाएगा।-अरविंद मलप्पा बंगारी, डीएम