जौनपुर। मोक्ष दायिनी गोमती नदी तेजी से सूखने लगी है। इसका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। गंगा में समाहित होने वाली इस नदी का दायरा दिन प्रतिदिन सिमटता जा रहा है। पानी कम होने से जलीय जीवों के लिए संकट पैदा हो गया है। वहीं गर्मी में नदी के प्रदूषित जल और बदबू से आसपास के लोग परेशान हैं। बुधवार को स्वच्छ अभियान के कार्यकर्ताओं ने साफ सफाई कर एक संदेश देने का प्रयास जरूर किया है।
गोमती नदी एक ऐतिहासिक नदी है। नदी के दोनों किनारों पर पूरा शहर बसा हुआ है। धीरे-धीरे नदी का दायरा कम होने लगा है। नदी नाले के रूप में परिवर्तित होने लगी है। शहर के नाले नदी में गिराए जा रहे हैं। नदी का जल स्रोत भूजल है, जिसका जलस्तर तेजी से गिर रहा है। इससे नदी सूखने लगी है। बुधवार को गोमती को स्वच्छ गोमती अभियान के मुख्य संरक्षक प्रो. विजयनाथ मिश्र के निर्देशन में बुधवार को हनुमान घाट नाले में ने सफाई अभियान चलाया गया। अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता ने बताया कि केंद्र व प्रदेश सरकार नदियों की स्वच्छता व निर्मलता को लेकर गंभीर व संवेदनशील हैं। इसके बावजूद नगर के बीच स्थित हनुमान घाट के नाले के कारण मां गोमती बदहाल हो रही है और प्रशासनिक महकमा जरा भी चिंतित नहीं है। उन्होंने शीघ्र ही नदी के तट से कचरा हटाने की व्यवस्था करने की मांग की। अभियान के सदर विधानसभा प्रभारी मनोज तिवारी व उपाध्यक्ष बृजेश मौर्य ने कहा कि नदी में ऐसे गंभीर प्रदूषण जैसे हालात पूरे नगरीय क्षेत्र में है। जिसके निवारण के लिए नालों को बंद किया जाना बेहद जरूरी है। अभियान की महिला इकाई की जिला संयोजिका अंजू पाठक ने कहा कि यदि शीघ्र जिला प्रशासन ने इस विषय पर गंभीरता के साथ कार्य नहीं किया तो अभियान आंदोलन के लिए बाध्य होगा। इस अवसर पर बलराम निषाद, चंदन निषाद, राजेंद्र विश्वकर्मा, कृपा सिंधु, अंकित सिंह, बलराम निषाद, संजय गुप्ता, मोहनीश शुक्ल, दिनेश साहू, उदय प्रताप यादव, जगमेंद्र निषाद, आलोक वैश्य उपस्थित आदि रहे।