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जौनपुर। एक जमाना था जब जौनपुर के इत्र की सुगंध दूर देश तक फैली थी। इसका उद्योग जिले में खूब फलफूल रहा था। मगर समय के साथ यह बंद हो गया। प्रदेश सरकार ने इसे पुनर्जीवित करने की पहल शुरू कर दी है। उद्योग विभाग के जरिए इसके समाप्त होने के कारणों की पड़ताल कराई गई है। इसकी रिपोर्ट 17 अप्रैल को जिले की प्रभारी मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी को भेज दिया गया है।
फूलों की सुगंध का आसवन चंदन के तेल में किया जाता है, जिससे इत्र तैयार होता था। उद्योग विभाग की जांच में पता चला है कि चंदन का तेल महंगा होने और उसकी उपलब्धता नहीं होने के कारण इत्र उद्योग को तगड़ा झटका लगा। जब इत्र उद्योग मंद पड़ गया तो फूलों की खेती भी बंद हो गई। रातरानी, चमेली, बेला, गुलरोगन जैसे सुगंधित पुष्प का उत्पादन किसानों ने बंद कर दिया। वर्ष 1980 में यह उद्योग बंद हो गया। तब इसका महज 12 लाख रुपये का सालाना का कारोबार रह गया था और 2500 से ज्यादा लोग काम कर रहे थे। जब आय कम हो गई तो लोगों ने काम छोड़ दिया। कच्चा माल सुलभ नहीं होने के कारण लागत बढ़ गई और धीरे-धीरे उद्योग समाप्त प्राय हो गया। लोगों की मांग पर प्रभारी मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी ने इसको पुनर्जीवित करने का मन बनाया है। उन्होंने उद्योग विभाग से इत्र उद्योग को फिर से शुरू करने के उपायों के बारे में जानकारी मांगी थी। उद्योग विभाग ने सर्वे करके उद्योग के बंद होने के कारणों का पता लगाया है। उसने 17 अप्रैल को अपनी सर्वे रिपोर्ट जिलाधिकारी के माध्यम से जिले की प्रभारी मंत्री को भेज दिया है।
सुविधा मिलने पर फिर से पनपेगा
जौनपुर। जिले के इत्र उद्यमियों का कहना है कि बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होने पर उद्योग फिर से पनप सकता है। जौनपुर सुगंधित तेल कुटिर उद्योग संघ के अध्यक्ष सोमेश्वर केसरवानी, संजय कुमार साहू, मोहम्मद यामीन जकरिया, घनश्याम साहू ने बताया कि सुगंधित फूलों की खेती. चंदन के तेल की आपूर्ति बंद हो जाने और कर की अधिकता के चलते लागत बढ़ गई थी। लागत अधिक हो जाने के कारण खरीददार कम हो गए। अगर सरकार बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराए तो यह उद्योग फिर से पनप सकता है।
जिले में इत्र का कारोबार को पुनर्जीवित करने के लिए प्रभारी मंत्री डा.रीताबहुगुणा जोशी ने सर्वे करने का निर्देश दिया था। इसकी जांच कर रिपोर्ट जिलाधिकारी के माध्यम से प्रभारी मंत्री को भेज दी गई है।-साहब सरन, सहायक आयुक्त उद्योग