जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल में बीपीएड में दाखिला को लेकर दुबिधा की स्थिति बनी हुई है। चालू सत्र में भी दाखिला की नीति नहीं बन पाई है। प्रवेश परीक्षा का कोई कार्यक्रम तय नहीं हुआ है। जानकारों का कहना है कि सत्र शून्य करने की तैयारी चल रही है। ऐसा हुआ तो चार जिलों के 15 बीपीएड कालेजों में ताला लग जाएगा।
आजमगढ़, गाजीपुर, मऊ, जौनपुर में बीपीएड के कुल 15 कालेज विश्वविद्यालय के संबद्ध हैं। जौनपुर दो, मऊ में दो, गाजीपुर में 8 और आजमगढ़ तीन कालेजों में बीपीएड की पढ़ाई होती है। गाजीपुर के किसान पीजी कालेज बघाव 120 और संत बुलाराम पीजी कालेज 00 सीटों पर दाखिला होता है। बीपीएड कालेजों में दाखिला के लिए वर्ष 2014 से न तो प्रवेश परीक्षा कराई गई और न ही कालेजों की सीट भरने के लिए विश्वविद्यालय स्तर से कोई पहल की गई। बीपीएड कालेजों में दाखिला नहीं होने से विश्वविद्यालय को भी नुकसान हो रहा है और कॉलेजों को भी। बीपीएड में दाखिला के नाम पर प्रति छात्र पचास हजार फीस वसूल की जाती है। इसमें से विश्वविद्यालय को केवल परीक्षा शुल्क मिलता है। शेष राशि कालेजों के खाते में चला जाता है। यदि मिलाकर देखा जाए तो चार करोड़ से अधिक का नुकशान कालेज और विश्वविद्यालय प्रशासन को हुआ है। चालू सत्र 2018-20 को भी शून्य करने की चर्चा है। इसे लेकर कालेजों संचालकों की मायूसी और बढ़ गई है।