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सिर्फ नाबालिग नहीं, किसी भी रेप की घटना पर हो फांसी

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जौनपुर। केंद्रीय कैबिनेट में 15 साल तक के बच्चों से रेप के दोषियों को फांसी की सजा संबंधी अध्यादेश पर मुहर लगाए जाने के बाद फिर बहस शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने पाक्सो एक्ट में बदलाव कर केंद्र सरकार को विचार करने को कहा था। यूपी के उन्नाव और जम्मू कश्मीर के कठुआ में हुई घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश को देखते हुए केंद्रीय कैबिनेट में इस पर मुहर लगाई है। इस मुद्दे पर महिलाओं का कहना है कि सिर्फ नाबालिग नहीं, किसी भी रेप की घटना में फांसी की सजा होनी चाहिए। अध्यादेश स्वागत योग्य है, लेकिन इसे उम्र में बांधना उचित नहीं है।
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पूर्वांचल विश्वविद्यालय के बॉयोटेक्नोलॉजी की विभागाध्यक्ष प्रो. वंदना राय का कहना है कि सिर्फ नाबालिग ही नहीं, सभी दुष्कर्म के मामलों में फांसी होनी चाहिए। इसे कटेगरी में बांटना उचित नहीं है। बच्चों से अधिक मुश्किल भरा जीवन युवतियों का ऐसे मामलों में हो जाता है। अपराध तो अपराध है चाहे छोटे के साथ हो चाहे बड़े के साथ। महिला समाख्या की समन्वयक डा. रजनी सिंह का कहना है कि बच्चियों से रेप पर फांसी का अध्यादेेश स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि बच्चियों के साथ घटनाएं विकृत मानसिकता का द्योतक है। ऐसे अध्यादेश से भय पैदा होगा और अपराधी को दंड भी मिलेगा। महिला चिकित्सक डा. बीना त्रिपाठी का कहना है कि ऐसी घटनाएं दूषित मानसिकता का परिचायक हैं। ऐसी घटनाओं को समाज में अधिक प्रचारित भी नहीं किया जाना चाहिए। पाक्सो एक्स में बदलाव कर नया अध्यादेश लाकर कानून बनाना उचित है। लेकिन इसका विभाजन उम्र में नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे अपराधों में दोषी लोगों के अभिभावक भी दोषी हैं जिन्होंने अच्छा संस्कार उन्हें नहीं दिया। मनोवैज्ञानिक डा. जाह्नवी श्रीवास्तव का कहना है कि अध्यादेश में फांसी की सजा स्वागत योग्य निर्णय है। कानूनी तौर पर भय पैदा होगा और घटनाएं भी कम होगी। उन्होंने कहा कि सरकार यह अध्यादेश ला रही है ताकि प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल आफेंस एक्ट (पाक्सो) में बदलाव किया जा सके।
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