जौनपुर। आबकारी की नई व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। इसमें हर कदम पर खामी ही खामी है। जिससे न केवल करोड़ों का राजस्व का नुकसान हो रहा है बल्कि शराब माफियाओं की भी चांदी है। ठेकेदार तो बदल गए लेकिन शराब पुरानी ही बेची जा रही है। जो नए ठेकेदार हैं वह शराब के लिए मारे मारे फिर रहे हैं। अंग्रेजी और देशी शराब की खेप आई जरूर लेकिन लेने के लिए लूट मच गया। बीयर का तो कहीं दूर-दूर तक पता नहीं है। ऐसे में नए ठेकेदार मारे मारे फिर रहे हैं।
नई बोतल में पुरानी शराब का जुमला जौनपुर में शराब कारोबारियों पर सटिक बैठ रहा है। लॉटरी प्रणाली से 107 अंग्रेजी, 100 बीयर, 156 देशी शराब की दुकानों का आवंटन हो चुका है। एक अप्रैल से कागजी फाइलों में दुकानदार बदल तो गए लेकिन वह दुकान नहीं खोल पाए हैं। अभी भी 16 देशी शराब की लॉटरी नहीं हो सकी है। इसके लिए दुबारा लॉटरी प्रक्रिया कराई जा रही है। नई व्यवस्था में होलोग्राम के स्थान पर शराब की बोतलों पर बार कोड सिस्टम लागू कर दिया गया है। नए आवंटन में शराब की कीमतों में भी वृद्घि हुई है। आबकारी विभाग ने दुकानों का आवंटन तो कर दिया लेकिन शराब की बारकोड पैकिंग में शराब की उपलब्धता नहीं कराई गई है। दुकानों में होलोग्राम मार्का वाली ही शराब जो दुकान खोले हैं वह बेच रहे हैं। कारोबारियों का मार्च महीने का कोटा बकाया है जिसे नई दुकानों में चोरी-चोरी खपाया जा रहा है। इस चक्कर में शराब सस्ते दामों पर भी बेची जा रही है। जिस तरह से शराब के दाम बढ़े हैं उससे ओवर रेट शराब की बिक्री होगी और आबकारी विभाग ओवर रेटिंग पर अंकुश नहीं लगा पाएगा। देशी शराब आईजीएल गोरखपुर और नंदगंज गाजीपुर डिस्टीलरी से आनी है लेकिन बारकोड की वजह से सप्लाई कम आ पा रही है। अंग्रेजी शराब 1750 पेटी आई जिसको लेने के लिए लूट मच गई। बीयर तो तीन दिन बाद भी नहीं आ सका है।
नई व्यवस्था होने के कारण कुछ अव्यवस्था हुई है। नई व्यवस्था में होलोग्राम के स्थान पर शराब की बोतलों पर बारकोड सिस्टम लागू कर दिया गया है। इस वजह से शराब की बारकोड पैकिंग में उपलब्धता कम हो पा रही है। जल्द ही इस समस्या का निस्तारण हो जाएगा।-पवन वर्मा, जिला आबकारी अधिकारी