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स्वच्छ गोमती के लिए नहीं है कोई योजना

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जौनपुर। गोमती नदी को प्रदूषण मुक्त किए बिना गंगा नदी को स्वच्छ बनाने का सपना पूरा नहीं हो सकता। यह नदी गाजीपुर सैदपुर के पास गंगा में ही मिलती है। बावजूद इसके गोमती को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए अभीतक कोई योजना नहीं है। स्वयं सेवी संस्था स्वच्छ गोमती अभियान ने गोमती को साफ सुथरा बनाने के लिए प्रोजेक्ट तैयार कर भारत सरकार और प्रदेश सरकार को सौंपा है। अभियान का दावा है कि सरकार ने अगर उनके प्रस्ताव पर अमल किया तो गोमती को प्रदूषण से मुक्त किया जा सकता है।
स्वच्छ गोमती अभियान की ओर से भारत सरकार को सौंपे गए प्रोजेक्ट के मुताबिक शहरी इलाके में नदी के दोनों छोर के सभी नालों को आपस में जोड़ा जाएगा। इन नालों को शहर के बाहर एक छोर पर रामघाट और दूसरे छोरपर जमैथा घाट के पास सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। नालों में बहने वाले गंदे पानी को ट्रीटमेंट कर उसे फिर से नदी में छोडने की योजना है। गोमती नदी के उद्गम स्थल से लेकर गंगा में विलीन होने तक रास्ते में जितने भी शहर नदी के किनारे बसें हैं हर शहर में ऐसा ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का सुझाव सरकार को स्वच्छ गोमती अभियान ने दिया है। इसपर तकरीबन 389 करोड़ का खर्च आएगा। स्वच्छ गोमती अभियान के प्रणेता संकट मोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र एवं प्रो. विजयनाथ मिश्र के मार्ग दर्शन में अभियान द्वावार गठित हाईपावर कमेटी ने यह प्लान तैयार किया है। कमेटी के अध्यक्ष जौनपुर के मूल निवासी वह केमिकल इंजीनियर प्रो. इंद्रमणि मिश्र को बनाया गया है। साथ ही इस कमेटी में देश के प्रमुख तकनीकी शिक्षा संस्थानों के ख्यातिलब्ध इंजीनियर, टिहरी बांध के डिजाइनर प्रो. एके काजमी, आईआईटी बीएचयू के पूर्व निदेशक प्रो, सिद्धनाथ उपाध्याय, आईआईटी रुड़की के प्रो. विमल चंद्र श्रीवास्तव, आईआईटी दिल्ली से प्रो, विवेक कुमार, डा. अमरीश अधाना के प्रयास से
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एक्सन प्लान तैयार किया गया है। स्वच्छ गोमती अभियान व हाईपावर कमेटी की टीम जौनपुर में डेरा डालकर 72 घंटे तक नाव पर बिताए थे। अलल अलग समय में नालों के पास से पानी का सैंपल लेने और उसकी जांच के बाद यह प्लान तैयार किया गया है।
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राष्ट्रपति को भी सौंपा गया है प्रस्ताव
जौनपुर। स्वच्छ गोतमी अभियान की ओर से तैयार किए गए गोमती एक्शन प्लान का प्रोजेक्ट 11 जनवरी को महामहिम राष्ट्रपति को स्वच्छ गोमती अभियान के प्रतिनिधि मंडल संरक्षक प्रो. विजयनाथ मिश्र, संरक्षक अरुण गुप्ता की अगुवाई में प्रतिनिधि मंडल ने सौपा था। इसके पहले तत्कालीन केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमाभारती को 17 जून को स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता ने सौंपा था। 26 दिसंबर को केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी को स्वच्छ गोमती अभियान के संरक्षक नीरज गुप्ता की अगुवाई में सौंपा गया था।
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