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कलेक्ट्रेट के पूर्व अध्यक्ष उदय प्रताप समेत 1

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जौनपुर। कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति के साधारण सभा की मंगलवार को हुई बैठक में काफी गहमागहमी रही। न्यायिक कार्य से विरत रहने के आदेश की अवहेलना करके डीएम कोर्ट में बहस करने वाले 18 अधिवक्ताओं को संगठन से निलंबित करने का फैसला लिया गया। इसमें समिति के पूर्व अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह, पूर्व मंत्री जयंत्री प्रसाद मिश्र भी शामिल हैं। उनको कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जिलाधिकारी को भी नोटिस जारी किया गया है।
कलेक्टर अधिवक्ता समिति का एसडीएम सदर प्रियंका प्रियदर्शिनी से आठ माह से मतभेद चल रहा था। एसडीएम सदर तथा कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति के पदाधिकारियों के बीच 27 जनवरी को वार्ता हुई, जिसमें गिला-शिकवा दूर किया गया। इस मसले पर चर्चा के लिए सोमवार को साधारण सभा की बैठक बुलाई गई थी और न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया गया था। इसके बावजूद जिलाधिकारी ने अपने न्यायालय में मामलों की सुनवाई की। कुछ अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य किया। इस मसले पर विचार के लिए साधारण सभा की मंगलवार को बैठक बुलाई गई। इसमें कहा गया कि न्यायिक कार्य से विरत नहीं रहने वाले अधिवक्ताओं ने समिति की मर्यादा को धूमिल किया है। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इसके बाद सर्वसम्मति से अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव पारित हुआ। कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति के अध्यक्ष विजय प्रताप सिंह ने बताया कि पूर्व अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह, पूर्व मंत्री जयंती प्रसाद मिश्र, वीरेंद्र श्रीवास्तव, कृष्ण नारायण पाठक, रामआसरे दुबे, राधेश्याम पांडे, हरिशंकर यादव, बृजेश सिंह, भगवान प्रसाद शुक्ला, सभाजीत यादव, लक्ष्मी निवास सिंह, हर्ष कुमार पांडेय, राजाराम शुक्ल, जीतेंद्र नाथ शुक्ल समेत 18 अधिवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साधारण सभा के अग्रिम निर्णय तक उनकी सदस्यता निलंबित रहेगी। डीएम को भी न्यायिक कार्य करने के बावत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
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हमने बहस की और जवाब भी दूंगा
जौनपुर। कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति के पूर्व अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह का कहना है कि मुझे न्यायिक कार्य से विरत रहने की जानकारी थी। डीएम जब कोर्ट में बैठ गए तो मुकदमे के वादी पक्ष के अधिवक्ता ने बहस शुरू कर दी। ऐसे में मुझे भी प्रतिवादी के तरफ से बहस करनी पड़ी। नोटिस नहीं मिला है, मिलेगा तो जवाब दूंगा।
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