नगर के तारापुर में जलसे को संबोधित करते मौलाना
जौनपुर। बेटियों को हर हाल में बेटों की तरह तरजीह मिलनी चाहिए। उनका रुतबा आला है। बेटियां ही मां-बाप को जन्नत में भेजने का जरिया बनती हैं। ये बातें नगर के तारापुर मोहल्ले में 9 रविउल अव्वल के मौके पर बुधवार की शाम मदरसा बेगा रसूल की ओर से आयोजित जलसे में बड़ी मस्जिद के मौलाना आरिफ ने कही।
जलसे में मौलाना ने पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद की सीरत पर रोशनी डालने के साथ लोगों को दीन के रास्ते पर चलने की हिदायत दी। नातख्वां ने नाते नबी के जरिए नजराने अकीदत पेश की। जलसे की शुरूआत तेलावते कुरान से की गई। जलसे में मौलाना आरिफ ने कहा कि बेटियों को बेटों की तरह तरजीह मिलनी चाहिए। बेटियां ही मां-बाप को जन्नत में भेजने का जरिया बनती हैं। अल्लाह इन्हीं की वजह से जन्नत के हर दरवाजे खोलता है। बाप अगर बाजार से कोई चीज लेकर आए तो पहले बेटी को दे। इसके बाद बेटे को। बेटियों के साथ कमतर बर्ताव नहीं किया जाना चाहिए। उनकी तालीम भी बेटों के बराबर होनी चाहिए। उन्हें अच्छा सलीका सिखाना चाहिए। जो लोग सच्चे दिल से माफी मांगते हैं अल्लाह उनकी मगफिरत फरमाता है। वो अपने उन बंदों को पसंद करता है जो मगफिरत के लिए दुआ करते हैं। यतीम और गरीबों से मोहब्बत करने वाला अल्लाह के करीब होता है। मौलाना समीर ने कहा कि नमाज पढ़ने से कामयाबी हासिल होती है। नमाज किसी भी सूरत में माफ नहीं है। हाफिज एहतेशाम ने कहा कि सिर्फ मुसलमान के घर पैदा हो जाने भर से दीन नहीं आ जाता। दीन को सीखना पड़ता है। दीन सिखाने वाला और उसे फैलाने वाले का दर्जा भी बहुत आला होता है। सभी बालिग मर्द और औरत पर नमाज फर्ज की गई है। इसमें कोताही बरतने वाला बख्शा नहीं जाएगा। मदरसा दावतुल ईमान के छात्र मोहम्मद अबुजर, मोहम्मद नोमान, मोहम्मद अजहर व मोहम्मद फराज ने नाते नबी पेश की। लियाकत अली और शफीक अंसारी ने लोगों का शुक्रिया अदा किया। इस दौरान सुबहान, रेयाज, नियाज, साहिल, महमूद, उसमान, गुलहसन आदि उपस्थित रहे। संचालन सलाहुद्दीन ने किया।